सुप्रीम कोर्ट आज फिर सुनवाई करेगा अरावली पर्वतमाला मामले में, 100 मीटर ऊंचाई वाले नियम पर रोक बरकरार
सुप्रीम कोर्ट आज अरावली पर्वतमाला मामले में फिर से सुनवाई करने जा रही है। इस मामले की चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की बेंच संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने पिछली सुनवाई में जमीन से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाली पहाड़ियों को अरावली मानने के नियम पर अस्थायी रोक लगा दी थी। यह रोक इस बात को सुनिश्चित करने के लिए लगाई गई थी कि इस नियम के लागू होने से पहले सभी पक्षों के तर्क और पर्यावरणीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखा जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अरावली पर्वतमाला की सुरक्षा और संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है और किसी भी तरह का नियम लागू करने से पहले पर्यावरण और स्थानीय हितधारकों की राय अवश्य ली जाए।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले का फैसला राज्य सरकारों और पर्यावरण संरक्षण एजेंसियों के लिए बड़ी मार्गदर्शिका साबित हो सकता है। यदि नियम को लागू किया जाता है, तो अरावली की पहाड़ियों पर निर्माण और अन्य गतिविधियों पर बड़ा प्रभाव पड़ेगा।
कोर्ट की बेंच में राज्य सरकारों, पर्यावरण संगठनों और निजी पक्षों के वकील शामिल हैं। सभी पक्ष अपने-अपने तर्कों के साथ कोर्ट के समक्ष उपस्थित होंगे। पिछले सुनवाई में पर्यावरणीय प्रभाव, भूमि उपयोग और विकास योजनाओं पर व्यापक बहस हुई थी।
अरावली पर्वतमाला भारत के पर्यावरणीय धरोहरों में शामिल है और इसे बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का यह मामला काफी अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले में आए फैसले का असर देशभर की पर्वतीय और हिल स्टेशन परियोजनाओं पर भी पड़ सकता है।
सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई में यह तय किया जाएगा कि कौन-कौन सी पहाड़ियाँ अरावली श्रेणी में आएंगी और उनका संरक्षण कैसे सुनिश्चित होगा। इससे पर्यावरण संरक्षण और विकास की संतुलित नीति तय करने में मदद मिलेगी।
इस मामले की सुनवाई को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं, वन विभाग और राज्य प्रशासन के अधिकारी भी सतर्क और चौकस हैं। माना जा रहा है कि कोर्ट का फैसला अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और भविष्य की परियोजनाओं के लिए अहम दिशा-निर्देश देगा।

