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अंदर डॉक्टर बनने की जद्दोजहद, बाहर अभिभावकों की ‘अग्निपरीक्षा’; समय समाप्त होते ही बंद हुए केंद्रों के द्वार

अंदर डॉक्टर बनने की जद्दोजहद, बाहर अभिभावकों की ‘अग्निपरीक्षा’; समय समाप्त होते ही बंद हुए केंद्रों के द्वार

नीट परीक्षा के दौरान परीक्षा केंद्रों के बाहर और भीतर का माहौल पूरी तरह अलग नजर आया। जहां अंदर परीक्षार्थी डॉक्टर बनने के सपने को साकार करने की जद्दोजहद में जुटे रहे, वहीं बाहर अभिभावक चिंता और बेचैनी के बीच ‘अग्निपरीक्षा’ से गुजरते दिखाई दिए।

निर्धारित समय दोपहर ठीक 1:30 बजे परीक्षा केंद्रों के मुख्य द्वार बंद कर दिए गए। इसके बाद किसी भी परीक्षार्थी को प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई, चाहे वह कुछ मिनट की देरी से ही क्यों न पहुंचा हो। इस सख्ती के चलते कई अभ्यर्थियों और उनके अभिभावकों में निराशा भी देखी गई।

परीक्षा केंद्रों के बाहर सुबह से ही अभिभावकों की भीड़ जुटी रही। जैसे-जैसे परीक्षा का समय नजदीक आता गया, उनकी बेचैनी बढ़ती गई। कई अभिभावक अपने बच्चों की सफलता की कामना करते हुए केंद्रों के बाहर ही इंतजार करते नजर आए।

अंदर परीक्षा कक्षों में अभ्यर्थी शांत माहौल में प्रश्नपत्र हल करने में जुटे रहे। प्रशासन की ओर से कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए थे, ताकि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष और नकलविहीन तरीके से संपन्न हो सके।

परीक्षा समाप्ति के बाद जब अभ्यर्थी बाहर निकले, तो कई चेहरों पर राहत तो कई पर थकान और तनाव साफ दिखाई दिया। अभिभावकों ने अपने बच्चों से परीक्षा के अनुभव को लेकर चर्चा की और उनके प्रदर्शन का आकलन किया।

परीक्षा केंद्रों पर तैनात अधिकारियों ने बताया कि समय की पाबंदी को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरती गई और सभी नियमों का सख्ती से पालन कराया गया। देर से पहुंचने वाले अभ्यर्थियों को नियमों के अनुसार प्रवेश नहीं दिया गया।

कुल मिलाकर, परीक्षा का दिन छात्रों और अभिभावकों दोनों के लिए भावनाओं से भरा रहा—जहां एक तरफ सपनों की परीक्षा थी, वहीं दूसरी तरफ धैर्य और उम्मीद की अग्निपरीक्षा।

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