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जयपुर के पास हरसौली में भूमिहीन परिवारों की दर-दर भटकती कहानी, सरकारी वादे खोखले

जयपुर के पास हरसौली में भूमिहीन परिवारों की दर-दर भटकती कहानी, सरकारी वादे खोखले

राजस्थान में सरकार लगातार यह दावा कर रही है कि वह भूमिहीन और घुमंतू परिवारों को आशियाना देने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन राजधानी जयपुर से महज 60 किलोमीटर दूर, दूदू पंचायत समिति की ग्राम पंचायत हरसौली से एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहां 16 भूमिहीन परिवार पिछले डेढ़ साल से अपनी हक की जमीन के लिए दर-दर भटक रहे हैं, जबकि उनकी जमीन पर उनके हक के दस्तावेज मौजूद हैं।

स्थानीय ग्रामीणों और प्रभावित परिवारों के अनुसार, ये परिवार पिछले डेढ़ साल से ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला प्रशासन के चक्कर काट रहे हैं। उनका कहना है कि भूमि के पट्टों और अधिकारों की प्रक्रिया में देरी के कारण उन्हें अपना घर बनाने या जीवन यापन के लिए स्थायी व्यवस्था नहीं मिल पाई। कई परिवार अब अस्थायी झोपड़ियों में रहकर अपने जीवन यापन के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

भू-मालिक परिवारों का कहना है कि उन्होंने आवश्यक दस्तावेज और आवेदन प्रशासन को जमा किए हैं, लेकिन इसके बावजूद अधिकारों के वितरण और पट्टों की मंजूरी अभी तक नहीं हुई है। इससे यह मामला सरकारी वादों और धरातलीय वास्तविकता के बीच की खाई को उजागर करता है।

स्थानीय अधिकारी इस मामले में कहते हैं कि जमीन वितरण की प्रक्रिया कानूनी और प्रशासनिक नियमों के अनुसार की जा रही है। लेकिन प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उन्हें असुविधा और अनदेखी का सामना करना पड़ रहा है। कई परिवारों ने कहा कि बच्चों की पढ़ाई, रोज़मर्रा की जरूरतें और जीवन यापन इस लंबी देरी के कारण प्रभावित हो रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि भूमिहीन परिवारों और ग्रामीण समुदायों को आवास और जमीन अधिकार सुनिश्चित करना राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी है। यदि इस तरह के मामलों में देरी होती है, तो सामाजिक असमानता और असुरक्षा की स्थिति पैदा होती है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि जमीन वितरण और पट्टों की मंजूरी में तेजी लाई जाए, ताकि इन परिवारों को स्थायी और सुरक्षित आवास मिल सके।

स्थानीय ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यह मामला केवल हरसौली तक सीमित नहीं है। राजस्थान के कई अन्य गांवों में भी भूमिहीन और घुमंतू परिवार वास्तविक हक की तलाश में संघर्षरत हैं। यह सरकार की योजना और धरातलीय हकीकत के बीच स्पष्ट विरोधाभास को दर्शाता है।

इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भूमिहीन परिवारों को आशियाना देने के सरकारी वादे अभी भी कई गांवों में पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं। हरसौली का यह मामला प्रशासन और सरकार के लिए एक चेतावनी और चुनौती भी है कि वे जमीन और आवास योजनाओं की गति बढ़ाकर वास्तविक जरूरतमंदों तक इसका लाभ पहुंचाएं।

16 परिवारों की यह कहानी इस बात की याद दिलाती है कि जमीन और आवास का हक सिर्फ सरकारी योजनाओं के घोषणापत्र में नहीं, बल्कि प्रभावित लोगों के जीवन में बदलाव लाने में निहित है। हरसौली में जमीन के लिए चल रही यह संघर्षपूर्ण कहानी राजस्थान के ग्रामीण और घुमंतू समुदायों के लिए सचेत और जागरूक करने वाला उदाहरण बनी हुई है।

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