स्कूलों से किताब हटाने का मुद्दा लोकसभा तक पहुंचा, डोटासरा की बीजेपी को चेतावनी, सियासत तेज
राजस्थान में स्कूलों से किताब हटाए जाने का मुद्दा अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। यह मामला अब लोकसभा तक गूंजने की तैयारी में है। Govind Singh Dotasra ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा पर निशाना साधते हुए चेतावनी दी है, जिसके बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है।
जानकारी के अनुसार स्कूल पाठ्यक्रम से किताब हटाए जाने को लेकर पहले से विवाद बना हुआ है। अब इस मुद्दे को संसद में उठाने की बात सामने आने के बाद राजनीतिक हलचल और तेज हो गई है। डोटासरा ने इसे शिक्षा और विचारधारा से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए भाजपा सरकार को घेरा है।
डोटासरा ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि किताबों को हटाने जैसे फैसलों को लेकर जवाबदेही तय होगी और यह मुद्दा लोकसभा में भी गूंजेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा के साथ छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस बयान के बाद राजस्थान की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस इसे शिक्षा और इतिहास से जुड़े मुद्दे के रूप में उठा रही है, जबकि भाजपा की ओर से भी जवाबी प्रतिक्रियाओं की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि शिक्षा और पाठ्यक्रम से जुड़े मुद्दे हमेशा संवेदनशील रहे हैं और इनका असर राजनीतिक विमर्श पर भी पड़ता है। ऐसे में लोकसभा तक मामला पहुंचने की बात इस विवाद को और बड़ा बना सकती है।
मार्चे पर कांग्रेस की सक्रियता और डोटासरा के आक्रामक तेवरों को राजनीतिक रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे को लेकर आने वाले दिनों में सियासी बयानबाजी और तेज हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाठ्यक्रम और किताबों को लेकर उठने वाले विवाद सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अक्सर वैचारिक और राजनीतिक बहस का रूप ले लेते हैं। यही वजह है कि यह मुद्दा अब प्रदेश से निकलकर राष्ट्रीय स्तर तक जाता दिख रहा है।
फिलहाल डोटासरा की चेतावनी और लोकसभा में मुद्दा गूंजने की चर्चा ने राजस्थान की राजनीति में नया तापमान बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के संकेत मिल रहे हैं।

