उस समय इसे “राजस्थान नहर परियोजना” के नाम से शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य पंजाब की सतलुज और ब्यास नदियों के पानी को राजस्थान के थार मरुस्थल तक पहुंचाकर वहां सिंचाई और पेयजल की व्यवस्था करना था।
इस परियोजना का शिलान्यास 1958 में तत्कालीन गृह मंत्री गोविंद बल्लभ पंत द्वारा किया गया माना जाता है। बाद में काम आगे बढ़ा और 1984 में इसका नाम बदलकर इंदिरा गांधी के नाम पर “इंदिरा गांधी नहर” कर दिया गया।
आज यह परियोजना राजस्थान की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण सिंचाई योजनाओं में गिनी जाती है, जिसने रेगिस्तान की जमीन को कृषि योग्य बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

