6 नवंबर से शुरू होगा दीपावली का पांच दिवसीय महापर्व, 8 नवंबर को मनाई जाएगी दीपावली; जानें कब है धनतेरस और रूप चौदस
दीपावली का पांच दिवसीय महापर्व 6 नवंबर से धनतेरस के साथ शुरू हो जाएगा। इस बार त्योहारों की शुरुआत धनतेरस से होगी। इसके अगले दिन 7 नवंबर को रूप चौदस मनाई जाएगी, जबकि 8 नवंबर को मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा-अर्चना के साथ दीपावली का पर्व मनाया जाएगा। पांच दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में घरों और प्रतिष्ठानों को सजाने, दीप जलाने और पूजा-पाठ की तैयारियां की जाएंगी।
6 नवंबर को धनतेरस से होगी शुरुआत
दीपावली पर्व का पहला दिन धनतेरस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर सोना, चांदी, बर्तन और अन्य उपयोगी वस्तुएं खरीदना शुभ माना जाता है। लोग अपने घरों और दुकानों में दीप जलाकर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
धनतेरस पर यमदीप जलाने की भी परंपरा है। मान्यता के अनुसार, शाम के समय घर के बाहर दीपक जलाकर यमराज से परिवार के सदस्यों की लंबी आयु और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना की जाती है।
7 नवंबर को मनाई जाएगी रूप चौदस
धनतेरस के अगले दिन 7 नवंबर को रूप चौदस का पर्व मनाया जाएगा। इसे नरक चतुर्दशी और छोटी दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने और शरीर पर उबटन लगाने की परंपरा है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, रूप चौदस पर विशेष स्नान और पूजा करने से सौंदर्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है। कई घरों में इस दिन भी शाम को दीप जलाए जाते हैं। दीपावली की तैयारियों के लिहाज से भी यह दिन महत्वपूर्ण माना जाता है।
8 नवंबर को मां लक्ष्मी और गणेश जी की पूजा
दीपावली का मुख्य पर्व 8 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन शाम को घरों, दुकानों और प्रतिष्ठानों में मां लक्ष्मी तथा भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाएगी। मां लक्ष्मी को धन और समृद्धि की देवी माना जाता है, जबकि भगवान गणेश को शुभता और विघ्नहर्ता के रूप में पूजा जाता है।
दीपावली पर लोग घरों की साफ-सफाई कर उन्हें दीपों और रोशनी से सजाते हैं। पूजा के बाद दीप जलाने और मिठाइयां बांटने की परंपरा है। परिवार के लोग एक साथ मिलकर त्योहार मनाते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
पांच दिनों तक रहेगा त्योहारों का उत्साह
धनतेरस से शुरू होकर दीपावली का यह महापर्व कई धार्मिक और पारिवारिक परंपराओं से जुड़ा है। बाजारों में खरीदारी, घरों की सजावट और पूजा की तैयारियों के साथ त्योहार का माहौल बनने लगेगा। हालांकि, आगे के पर्वों की तिथियों और पूजा के शुभ मुहूर्त की जानकारी पंचांग के अनुसार देखना जरूरी होगा।

