NH-8 फोरलेन किनारे मादा तेंदुए का शव मिलने से सनसनी, वन विभाग में मचा हड़कंप
राजस्थान के Rajsamand जिले के केलवा थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे-8 पर मादा तेंदुए का शव मिलने से हड़कंप मच गया। गोमती-उदयपुर फोरलेन पर मोखमपुरा के पास सड़क किनारे तेंदुए का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही वन विभाग और प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंच गया।
जानकारी के अनुसार स्थानीय ग्रामीणों ने सड़क किनारे मादा तेंदुए का शव पड़ा देखा, जिसके बाद तुरंत वन विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर सूचना दी गई। सूचना मिलते ही विभाग में हड़कंप मच गया और अधिकारी टीम के साथ मौके के लिए रवाना हुए।
बताया जा रहा है कि तेंदुए का शव हाईवे किनारे पड़ा मिला, जिससे शुरुआती तौर पर किसी दुर्घटना की आशंका जताई जा रही है। माना जा रहा है कि फोरलेन पर किसी वाहन की चपेट में आने से तेंदुए की मौत हुई हो सकती है, हालांकि वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर शव को कब्जे में लिया और जांच प्रक्रिया शुरू की। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण कर आसपास के हालात का जायजा लिया। साथ ही यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि तेंदुआ किस दिशा से आया था और घटना किन परिस्थितियों में हुई।
ग्रामीणों के मुताबिक क्षेत्र में वन्यजीवों की आवाजाही पहले भी देखी जाती रही है। ऐसे में हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों के बीच वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मादा तेंदुए की मौत ने वन्यजीव संरक्षण और सड़क सुरक्षा दोनों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम कराया जाएगा, जिससे मौत के सही कारणों का पता लगाया जा सके। यदि किसी वाहन की टक्कर की पुष्टि होती है तो उस दिशा में भी जांच आगे बढ़ाई जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि फोरलेन और हाईवे क्षेत्रों से गुजरने वाले वन्यजीवों के लिए सुरक्षित कॉरिडोर और चेतावनी उपाय जरूरी हैं। लगातार बढ़ते सड़क हादसे वन्यजीवों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। ऐसे में इस तरह की घटनाएं संरक्षण व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी चिंता का माहौल है। ग्रामीणों ने वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए हाईवे पर अतिरिक्त उपाय करने की मांग उठाई है।
फिलहाल वन विभाग पूरे मामले की जांच में जुटा है और मादा तेंदुए की मौत के कारणों का पता लगाया जा रहा है। राजसमंद में हुई यह घटना एक बार फिर इंसानी विकास और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन की जरूरत को सामने लेकर आई है।

