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92 साल पुराने विद्यालय की जर्जर हालत, मरम्मत फाइलें अटकीं; शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

92 साल पुराने विद्यालय की जर्जर हालत, मरम्मत फाइलें अटकीं; शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

राजस्थान के राजसमंद जिला में स्थित बालकृष्ण विद्या भवन राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की मौजूदा स्थिति ने शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। 92 वर्ष पुराने इस विद्यालय का भवन सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा पहले ही कंडम घोषित किया जा चुका है, बावजूद इसके मरम्मत और पुनर्निर्माण की फाइलें अब तक कागजों से आगे नहीं बढ़ पाई हैं।

विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति को लेकर पिछले कई वर्षों से लगातार पत्राचार होता रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी। वर्ष 2021 में 23 जुलाई को भवन का भौतिक सत्यापन किया गया था, जिसमें इंजीनियरों ने मौके पर पहुंचकर नापजोख की और करीब 346.10 लाख रुपये का विस्तृत एस्टीमेट तैयार किया। इस रिपोर्ट के बाद उम्मीद जगी थी कि जल्द ही मरम्मत कार्य शुरू होगा।

सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना के लिए डीएमएफटी से राशि भी स्वीकृत कर दी गई थी। इसके बावजूद काम शुरू नहीं हो सका, जिससे यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि यह स्थिति बच्चों की सुरक्षा और भविष्य दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है।

विद्यालय की वर्तमान हालत इतनी खराब हो चुकी है कि कई जगहों पर दीवारों में दरारें, छत से पानी टपकना और ढांचे की कमजोरी साफ दिखाई देती है। ऐसे में यहां पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि सरकार और प्रशासन को इस मामले को प्राथमिकता देते हुए तुरंत कदम उठाने चाहिए।

जानकारी के मुताबिक, इस पूरे मामले को लेकर कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि यह मामला कथित रूप से राजनीतिक कारणों की भेंट चढ़ गया है, जिसके चलते कार्य में देरी हो रही है।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की स्थिति शिक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है। जब विद्यालय जैसी बुनियादी संस्थाएं ही जर्जर अवस्था में हों, तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कल्पना करना मुश्किल हो जाता है। उनका कहना है कि इस तरह के मामलों में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल, बालकृष्ण विद्या भवन की स्थिति एक गंभीर सवाल बनकर खड़ी है। जहां एक ओर कागजों में योजनाएं और स्वीकृतियां मौजूद हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर कार्य शुरू होने का इंतजार आज भी जारी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक ठोस कदम उठाता है और बच्चों को सुरक्षित व बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराता है।

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