जयपुर के दुष्यंत हत्याकांड का दोषी 5 दिन थाइलैंड घूम आया, खुली जेल में लगती रही फर्जी हाजिरी; शिकायत के बाद खुलासा
जयपुर के चर्चित दुष्यंत हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहा दीक्षांत कामरा जेल से बाहर जाकर पांच दिन तक थाइलैंड घूम आया। हैरानी की बात यह है कि उसकी विदेश यात्रा के दौरान श्रीगंगानगर की खुली जेल में उसकी हाजिरी भी लगती रही। पासपोर्ट पर दर्ज यात्रा की तारीखों से इस मामले का खुलासा हुआ है।
जानकारी के अनुसार, दीक्षांत कामरा 9 अक्टूबर 2025 से 13 अक्टूबर 2025 तक थाइलैंड में रहा। इस दौरान जेल रिकॉर्ड में उसकी मौजूदगी दर्ज होती रही। वह विदेश यात्रा पूरी करने के बाद वापस खुली जेल लौट आया। बाद में किसी व्यक्ति की ओर से शिकायत किए जाने पर जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और दीक्षांत की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठे।
पासपोर्ट पर दर्ज तारीखों से सामने आया मामला
दीक्षांत की थाइलैंड यात्रा की जानकारी उसके पासपोर्ट पर दर्ज तारीखों से सामने आई। रिकॉर्ड के मुताबिक, वह 9 अक्टूबर को भारत से रवाना हुआ और 13 अक्टूबर को वापस लौटा। इस तरह वह पांच दिन तक देश से बाहर रहा।आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे कैदी का इस तरह विदेश जाना और उसी दौरान जेल में उस हाजिरी दर्ज होना गंभीर मामला है। इससे खुली जेल की निगरानी व्यवस्था और हाजिरी दर्ज करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं।
खुली जेल में कैसे लगती रही हाजिरी?
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि दीक्षांत कामरा की गैरमौजूदगी के बावजूद जेल में उसकी नियमित हाजिरी कैसे दर्ज होती रही। खुली जेल में बंदियों की निगरानी और उनकी उपस्थिति दर्ज करने की जिम्मेदारी संबंधित जेल प्रशासन की होती है। ऐसे में पांच दिन तक बंदी के विदेश में रहने और रिकॉर्ड में उसकी मौजूदगी दर्ज होने की बात सामने आने से निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।शिकायत के बाद मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया। इसके बाद दीक्षांत की विदेश यात्रा और जेल में दर्ज हाजिरी के रिकॉर्ड को लेकर जांच की स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है।
जेल प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
मामले में यह पता लगाना जरूरी है कि हाजिरी किस कर्मचारी ने दर्ज की और क्या किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति की मिलीभगत से ऐसा किया गया। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि दीक्षांत को विदेश जाने की अनुमति मिली थी या उसने बिना अनुमति यात्रा की।अगर जेल रिकॉर्ड में जानबूझकर गलत जानकारी दर्ज की गई है तो संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही भी तय हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई या जांच के अंतिम नतीजे की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
दुष्यंत हत्याकांड में आजीवन कारावास की सजा
दीक्षांत कामरा जयपुर के चर्चित दुष्यंत हत्याकांड में दोषी ठहराया गया था और उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। वह श्रीगंगानगर की खुली जेल में सजा काट रहा था। खुली जेल में बंदियों को निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्रता मिलती है, लेकिन उन्हें जेल प्रशासन के निर्देशों और निगरानी व्यवस्था का पालन करना होता हैइस घटना ने खुली जेल में बंदियों की निगरानी, उपस्थिति सत्यापन और विदेश यात्रा से जुड़े नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब मामले में यह देखना अहम होगा कि दीक्षांत कामरा की विदेश यात्रा किन परिस्थितियों में हुई और फर्जी हाजिरी दर्ज करने के लिए कौन जिम्मेदार था।

