मानसून से पहले शहर के नालों की सफाई को लेकर नगर निगम के दावे सवालों के घेरे में आ गए हैं। करीब एक करोड़ 99 लाख 857 हजार रुपए का टेंडर जारी होने के बावजूद कई इलाकों में नाला सफाई केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है। शहरवासियों का आरोप है कि सफाई कार्य में जमकर खानापूर्ति की जा रही है, जबकि बरसात सिर पर है और जलभराव का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है।
नगर निगम ने शहर के बड़े और छोटे नालों की सफाई के लिए करोड़ों रुपए का बजट स्वीकृत किया था। अधिकारियों का दावा था कि मानसून आने से पहले सभी प्रमुख नालों की गहराई तक सफाई कर दी जाएगी ताकि बारिश के दौरान जलभराव और गंदगी की समस्या न हो। लेकिन जमीनी हालात इन दावों से बिल्कुल अलग दिखाई दे रहे हैं।
शहर के कई इलाकों में नालों में अब भी गाद, प्लास्टिक कचरा और झाड़ियां जमा हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सफाई के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है। कुछ जगहों पर कर्मचारियों ने केवल ऊपर से कचरा हटाकर काम पूरा दिखा दिया, जबकि नालों की अंदरूनी सफाई नहीं की गई। इससे नालों का पानी सुचारु रूप से बह नहीं पा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि हर साल बारिश से पहले करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन पहली ही बारिश में शहर की सड़कों पर पानी भर जाता है। कई कॉलोनियों और बाजारों में जलभराव के कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। व्यापारियों का कहना है कि नाला सफाई सही तरीके से नहीं होने पर बरसात में दुकानों तक पानी पहुंच जाता है, जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
मामले को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब लगभग दो करोड़ रुपए का टेंडर जारी किया गया है तो फिर सफाई कार्य का असर जमीन पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच कराने और संबंधित अधिकारियों व ठेकेदारों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
वहीं नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि सफाई कार्य लगातार जारी है और निर्धारित समयसीमा में सभी नालों की सफाई पूरी कर ली जाएगी। अधिकारियों ने कुछ स्थानों पर अतिक्रमण और तकनीकी समस्याओं के कारण कार्य में देरी होने की बात कही है। हालांकि शहरवासी इन दावों से संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं।
शहर में करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद यदि नाला सफाई प्रभावी तरीके से नहीं हो पा रही है तो यह प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि नगर निगम समय रहते व्यवस्थाओं को कितना दुरुस्त कर पाता है, ताकि मानसून के दौरान शहरवासियों को जलभराव और गंदगी की समस्या से राहत मिल सके।

