राज्य में जल संरक्षण और पुनर्चक्रण की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय प्रक्रिया चल रही है। अब यह तय करने के लिए तकनीकी समिति का गठन किया गया है कि प्रोसेस हाउस में सीवरेज के शोधित (ट्रीटेड) पानी का उपयोग किया जा सकता है या नहीं।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला उद्योगों में जल उपयोग को अधिक सतत और पर्यावरण अनुकूल बनाने से जुड़ा है। प्रोसेस हाउस में औद्योगिक गतिविधियों के दौरान बड़ी मात्रा में पानी की खपत होती है, ऐसे में शोधित सीवरेज पानी के उपयोग को एक वैकल्पिक संसाधन के रूप में देखा जा रहा है।
तकनीकी समिति इस प्रस्ताव के सभी पहलुओं की जांच करेगी, जिसमें पानी की गुणवत्ता, सुरक्षा मानक, औद्योगिक उपयोग की उपयुक्तता और पर्यावरणीय प्रभाव शामिल होंगे। समिति की रिपोर्ट के आधार पर ही आगे अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, यदि शोधित पानी को प्रोसेस हाउस में उपयोग की अनुमति मिलती है, तो इससे न केवल ताजे पानी की खपत में कमी आएगी बल्कि जल संसाधनों पर दबाव भी घटेगा।
राज्य में पहले से ही शहरी क्षेत्रों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के माध्यम से पानी को शुद्ध करने की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन उसका औद्योगिक उपयोग सीमित स्तर पर ही हो पा रहा है। इस नई पहल से उस पानी के उपयोग का दायरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम जल संकट से निपटने और उद्योगों में लागत कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, बशर्ते सभी तकनीकी मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
कुल मिलाकर, प्रोसेस हाउस में शोधित सीवरेज पानी के उपयोग को लेकर अब अंतिम निर्णय तकनीकी समिति की रिपोर्ट पर निर्भर करेगा, जिससे राज्य की जल नीति में एक बड़ा बदलाव संभव माना जा रहा है।

