भीषण गर्मी में स्कूल खोलने और ग्रीष्मकालीन अवकाश में कटौती पर शिक्षक संघ का विरोध, शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन
प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच 21 जून से विद्यालय खोलने और शिक्षकों के ग्रीष्मकालीन अवकाश में 10 दिन की कटौती के निर्णय को लेकर प्राथमिक अध्यापक संघ (लेवल प्रथम) ने कड़ा विरोध जताया है। संघ ने इस फैसले को अव्यवहारिक बताते हुए शिक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर पुनर्विचार की मांग की है।
शिक्षक संघ का कहना है कि जून महीने में तापमान अपने चरम पर रहता है, ऐसे में छोटे बच्चों के स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। संघ ने तर्क दिया कि गर्मी के मौसम में कक्षाओं का संचालन बच्चों के लिए कठिन और जोखिम भरा हो सकता है।
🌡️ भीषण गर्मी को लेकर चिंता
संघ पदाधिकारियों के अनुसार, राजस्थान के कई जिलों में जून के दौरान तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से भी ऊपर पहुंच जाता है। ऐसे में विद्यालयों में नियमित कक्षाएं चलाना बच्चों के स्वास्थ्य के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उन्होंने कहा कि पहले से ही गर्मी के कारण कई जिलों में हालात गंभीर रहते हैं।
📄 अवकाश कटौती पर भी नाराजगी
शिक्षकों ने ग्रीष्मकालीन अवकाश में 10 दिन की कटौती को भी अनुचित बताया है। उनका कहना है कि यह निर्णय शिक्षकों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है, क्योंकि पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान लगातार कार्यभार रहता है।
संघ ने मांग की है कि पुराने अवकाश पैटर्न को ही यथावत रखा जाए और किसी भी तरह की कटौती पर पुनर्विचार किया जाए।
🏫 शिक्षा विभाग से पुनर्विचार की अपील
प्राथमिक अध्यापक संघ ने शिक्षा मंत्री से अपील की है कि इस निर्णय को वापस लिया जाए या फिर इसमें संशोधन किया जाए। संघ ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक नीति को लागू करने से पहले जमीनी परिस्थितियों और मौसम की स्थिति का ध्यान रखा जाना चाहिए।
⚡ शिक्षकों में असंतोष
इस निर्णय को लेकर शिक्षकों में असंतोष का माहौल है। कई शिक्षकों का कहना है कि बिना पर्याप्त विचार-विमर्श के ऐसे फैसले लागू करना उचित नहीं है।
📢 आगे आंदोलन की संभावना
संघ ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो वे आगे आंदोलनात्मक कदम भी उठा सकते हैं।

