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TET अनिवार्य होने से शिक्षकों में बढ़ी चिंता, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केंद्र की मुहर

TET अनिवार्य होने से शिक्षकों में बढ़ी चिंता, सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केंद्र की मुहर

राजस्थान सहित पूरे देश के लाखों शिक्षकों के लिए अब ‘करो या मरो’ जैसी स्थिति बन गई है। नौकरी बनाए रखने और पदोन्नति हासिल करने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट के अहम फैसले पर केंद्र सरकार ने भी मुहर लगा दी है, जिसके बाद शिक्षा क्षेत्र में हलचल तेज हो गई है।

इस निर्णय के तहत अब प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के शिक्षकों के लिए टीईटी पास करना जरूरी होगा। पहले कई राज्यों में नियुक्त शिक्षकों को इस परीक्षा से छूट या ढील मिलती रही थी, लेकिन अब नए नियमों के अनुसार सभी को निर्धारित मानकों को पूरा करना होगा। इसका सीधा असर लाखों शिक्षकों पर पड़ेगा, जो वर्षों से सेवा में हैं लेकिन अभी तक टीईटी उत्तीर्ण नहीं कर पाए हैं।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। टीईटी को एक न्यूनतम योग्यता मानते हुए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि केवल योग्य और प्रशिक्षित शिक्षक ही छात्रों को शिक्षा दें। हालांकि, इस फैसले ने कई शिक्षकों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

राजस्थान समेत कई राज्यों में शिक्षक संगठनों ने इस निर्णय पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों के लिए अचानक इस तरह की अनिवार्यता लागू करना व्यावहारिक नहीं है। कई शिक्षक उम्र, पारिवारिक जिम्मेदारियों और अन्य कारणों से परीक्षा की तैयारी करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं। ऐसे में उनकी नौकरी पर संकट मंडराने लगा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जहां एक ओर यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, वहीं दूसरी ओर इसे लागू करने के लिए चरणबद्ध और संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। यदि उचित समय और संसाधन नहीं दिए गए, तो इससे शिक्षकों में असंतोष बढ़ सकता है।

केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना सभी राज्यों के लिए अनिवार्य होगा। इसके तहत राज्यों को अपने-अपने स्तर पर नियमों में आवश्यक संशोधन कर टीईटी को लागू करना होगा। आने वाले समय में इस फैसले का व्यापक असर देखने को मिल सकता है।

फिलहाल, शिक्षकों के बीच इस निर्णय को लेकर असमंजस और चिंता का माहौल है। कई शिक्षक इसे अपने भविष्य से जुड़ा बड़ा फैसला मान रहे हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार इस फैसले को किस तरह लागू करती है और शिक्षकों को इससे निपटने के लिए क्या राहत या विकल्प दिए जाते हैं।

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