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वीडियो में देंखे अपेक्स यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने युवाओं को ज्ञान और समाज सेवा का आह्वान किया

वीडियो में देंखे अपेक्स यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने युवाओं को ज्ञान और समाज सेवा का आह्वान किया

गुजरात स्थित अपेक्स यूनिवर्सिटी के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में रविवार को विद्यार्धियों को संबोधित करते हुए स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और युवाओं के सामाजिक दायित्वों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता एक दोधारी तलवार की तरह है, जिसका सही और सकारात्मक उपयोग करना अत्यंत आवश्यक है। उनका मानना है कि अगर एआई का उपयोग विवेकपूर्ण तरीके से किया जाए, तो यह समाज और देश के विकास में क्रांतिकारी योगदान दे सकता है, लेकिन इसका गलत इस्तेमाल गंभीर नकारात्मक परिणाम ला सकता है।

स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि उन्हें अपने ज्ञान, कौशल और तकनीकी क्षमताओं का उपयोग केवल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि देश और समाज की भलाई के लिए करना चाहिए। उनका यह संदेश युवा वर्ग के लिए मार्गदर्शन का काम करेगा और उन्हें अपने सामाजिक दायित्वों को समझने की प्रेरणा देगा।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अन्य प्रमुख अतिथि संदीप जैन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि समाज और देश से जो कुछ हमें मिला है, उसे लौटाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे वैमनस्य, नफरत और सामाजिक असमानता जैसे “कचरे” को दूर करके एक सुंदर और स्वस्थ समाज का निर्माण करें। उनके अनुसार, सिर्फ व्यक्तिगत सफलता पर्याप्त नहीं है, बल्कि सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारियों को समझना और उन्हें निभाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

कार्यक्रम में उपस्थित शिवव्रत महापात्र ने भी युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि युवाओं को भारत बोध को समझना चाहिए और अपने ज्ञान, शिक्षा और कौशल का उपयोग देश की सेवा के लिए करना चाहिए। उनके अनुसार, युवा वर्ग देश का भविष्य है और उनके सक्रिय योगदान से ही समाज और राष्ट्र की समृद्धि सुनिश्चित की जा सकती है।

इस दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों को उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन और शिक्षा की उपलब्धियों के लिए सम्मानित भी किया गया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने समारोह का आयोजन इस तरह किया कि यह न केवल विद्यार्थियों की उपलब्धियों को मान्यता दे, बल्कि उन्हें समाज और देश की सेवा के लिए प्रेरित भी करे।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के समारोह और विद्वानों के मार्गदर्शन से युवा वर्ग में सकारात्मक दृष्टिकोण, नैतिक जिम्मेदारी और तकनीकी ज्ञान के सही उपयोग की भावना बढ़ती है। स्वामी जितेन्द्रानंद सरस्वती और अन्य वक्ताओं के विचार युवाओं के व्यक्तित्व और सामाजिक चेतना को गहरा प्रभाव देंगे।

दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों, शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को एक भव्य स्वरूप दिया। इस अवसर पर शिक्षा, नैतिकता, तकनीक और समाज सेवा के महत्व को संतुलित रूप में प्रस्तुत किया गया, जिससे आने वाली पीढ़ियों में ज्ञान का सकारात्मक और सामाजिक उपयोग बढ़ेगा।

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