अजमेर सेंट्रल जेल में नशे की गोलियों की सप्लाई का शक, एक नंबर पर 1283 कॉल; जुड़े खाते में 50 लाख का लेन-देन
अजमेर सेंट्रल जेल से नशे की गोलियों की सप्लाई से जुड़ा संदिग्ध मामला सामने आया है। जेल से एक मोबाइल नंबर पर 1283 बार कॉल किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच में यह भी पता चला है कि जिस मोबाइल नंबर से संपर्क था, उससे जुड़े बैंक खाते में करीब 50 लाख रुपए का लेन-देन हुआ है। इस खुलासे के बाद जेल प्रशासन और जांच एजेंसियों की निगाहें पूरे नेटवर्क पर टिक गई हैं।
मामले की जांच में जेल के अंदर से लगातार एक ही मोबाइल नंबर पर संपर्क किए जाने की बात सामने आई है। इतनी बड़ी संख्या में कॉल होने के बाद अधिकारियों ने संबंधित नंबर और उससे जुड़े बैंक खाते की गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है।
1283 बार किया गया कॉल
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि अजमेर सेंट्रल जेल के अंदर से संबंधित मोबाइल नंबर पर 1283 बार कॉल की गई। लगातार संपर्क होने के कारण जांच अधिकारियों को संदेह है कि जेल के अंदर और बाहर मौजूद लोगों के बीच नियमित संपर्क था।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन कॉल्स के जरिए किन लोगों से संपर्क किया गया और बातचीत का उद्देश्य क्या था। कॉल डिटेल रिकॉर्ड के आधार पर पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है।
जुड़े बैंक खाते में 50 लाख का ट्रांजैक्शन
जांच में मोबाइल नंबर से जुड़े बैंक खाते में करीब 50 लाख रुपए के लेन-देन की जानकारी भी सामने आई है। इतनी बड़ी रकम के ट्रांजैक्शन ने मामले को और गंभीर बना दिया है।
जांच एजेंसियां अब बैंक खाते में आने और जाने वाली रकम के स्रोत की पड़ताल कर रही हैं। यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पैसा किन लोगों या खातों से आया और किन खातों में भेजा गया।
नशे की गोलियों की सप्लाई का शक
पूरे मामले की जांच नशे की गोलियों की कथित सप्लाई के एंगल से की जा रही है। अधिकारियों को संदेह है कि जेल के अंदर से बाहर मौजूद नेटवर्क के जरिए नशीली दवाओं की सप्लाई या खरीद-फरोख्त से जुड़ा कोई कनेक्शन हो सकता है।
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि 50 लाख रुपए का पूरा लेन-देन नशे की गोलियों की सप्लाई से ही जुड़ा था। इसकी पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
जेल में मोबाइल इस्तेमाल पर सवाल
जेल से 1283 बार फोन किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। जेल में मोबाइल फोन और अन्य प्रतिबंधित वस्तुओं की पहुंच रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था होती है।
अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगाएंगी कि संबंधित मोबाइल फोन जेल के अंदर कैसे पहुंचा और उसका इस्तेमाल किसने किया। यदि जेल कर्मचारियों या अन्य लोगों की मिलीभगत सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियां कॉल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन और जेल से जुड़े लोगों की गतिविधियों की जांच कर रही हैं। मामले में आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

