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अरावली संरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, वीडियो में CJI सूर्यकांत बोले- 'लगता है कमेटी मेरे रिटायरमेंट का इंतजार कर रही है'

अरावली संरक्षण मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, वीडियो में CJI सूर्यकांत बोले- 'लगता है कमेटी मेरे रिटायरमेंट का इंतजार कर रही है'

अरावली की परिभाषा तय करने और इसके संरक्षण को लेकर गठित हाई पावर्ड कमेटी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सख्त रुख अपनाया। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच ने कमेटी द्वारा रिपोर्ट सौंपने के लिए मांगे गए अतिरिक्त समय पर नाराजगी जताई।सुनवाई के दौरान हाई पावर्ड कमेटी ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 27 फरवरी 2027 तक का समय मांगा था। इस पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि कमेटी की मांग से ऐसा लगता है कि वह उनके रिटायरमेंट का इंतजार कर रही है।

कमेटी ने मांगा था 6 महीने का अतिरिक्त समय

सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को अरावली की पहचान, उसकी सीमा और संरक्षण से जुड़े मामले पर सुनवाई हुई। इस दौरान हाई पावर्ड कमेटी ने अपनी रिपोर्ट पूरी करने के लिए छह महीने का अतिरिक्त समय मांगा।कमेटी की ओर से 27 फरवरी 2027 तक का समय देने का अनुरोध किया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को स्वीकार नहीं किया और रिपोर्ट जमा करने के लिए सीमित समय दिया।CJI सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने कमेटी को अब 30 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में और देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

'दिन-रात काम करके समय पर रिपोर्ट दें'

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कमेटी को निर्धारित समय सीमा में काम पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट तैयार करने के लिए कमेटी को दिन-रात काम करना होगा ताकि तय समय के भीतर प्रक्रिया पूरी की जा सके।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अरावली जैसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मामले में लंबे समय तक देरी उचित नहीं है। अदालत इस मामले में जल्द निष्कर्ष तक पहुंचना चाहती है।

2 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने हाई पावर्ड कमेटी को 30 नवंबर तक रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।अदालत इस मामले में अरावली की स्पष्ट परिभाषा और उसके संरक्षण के लिए प्रभावी कदमों पर विचार कर रही है। अरावली पर्वतमाला पर्यावरणीय दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यह भूजल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और जैव विविधता के लिहाज से अहम भूमिका निभाती है।

अरावली संरक्षण को लेकर लंबे समय से चल रही है सुनवाई

अरावली क्षेत्र में अवैध निर्माण, खनन और पर्यावरणीय नुकसान को लेकर लंबे समय से चिंता जताई जाती रही है। इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की स्थिति और संरक्षण उपायों के लिए हाई पावर्ड कमेटी का गठन किया था।अब अदालत की सख्ती के बाद कमेटी को जल्द रिपोर्ट पेश करनी होगी। सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई में रिपोर्ट के आधार पर आगे की दिशा तय की जाएगी।

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