प्रतापगढ़ में फॉरेस्ट रेंजर की मौत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राजस्थान सरकार से मांगा जवाब; 6 अक्टूबर को अगली सुनवाई
राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में फॉरेस्ट रेंजर प्रताप सिंह चुंडावत की मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। शीर्ष अदालत ने घटना का संज्ञान लेते हुए राजस्थान सरकार से विस्तृत जवाब और अब तक की कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले को गंभीर और तत्काल सुनवाई योग्य बताया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर 2026 को तय की है।
अदालत के सामने न्यायमित्र ने रखा मामला
वरिष्ठ अधिवक्ता निखिल गोयल ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने फॉरेस्ट रेंजर की मौत का मामला उठाया। गोयल राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध खनन से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले में न्यायमित्र के तौर पर अदालत की सहायता कर रहे हैं। उन्होंने कोर्ट को घटना से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट की जानकारी दी। राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने अदालत को बताया कि घटना को लेकर कार्रवाई शुरू की जा चुकी है और विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल की जाएगी।
21 सितंबर की रात हुआ था हादसा
पुलिस और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, प्रताप सिंह चुंडावत 21 सितंबर की रात छोटी सादड़ी क्षेत्र में कथित अवैध मिट्टी खनन की सूचना पर कार्रवाई करने गई वन विभाग की टीम का हिस्सा थे। इस दौरान एक डंपर को रोकने की कोशिश की गई। पुलिस के मुताबिक, डंपर और रेंजर की मोटरसाइकिल के बीच टक्कर हुई, जिसमें प्रताप सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मौके से डंपर और जेसीबी को पुलिस ने कब्जे में लेकर पूछताछ शुरू की थी।
अवैध खनन से जुड़े मामलों पर कोर्ट की चिंता
सुप्रीम कोर्ट पहले से ही राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य में अवैध खनन के मामले की निगरानी कर रहा है। इसी क्रम में अदालत ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में अवैध खनन पर निगरानी बढ़ाने, अवैध खनन नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई और अग्रिम मोर्चे पर काम करने वाले वन कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर निर्देश दिए हैं। जुलाई 2026 के आदेश में अदालत ने संगठित अवैध खनन से जुड़े कथित सरगनाओं और आदतन अपराधियों के खिलाफ निवारक निरोध पर विचार करने को भी कहा था।
राज्य सरकार को देनी होगी कार्रवाई रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने प्रताप सिंह चुंडावत की मौत के मामले में राजस्थान सरकार से अब तक की कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा मांगा है। अदालत ने ऐसे मामलों में निवारक निरोध जैसे कदमों की जरूरत पर भी टिप्पणी की। हालांकि, राजस्थान सरकार की ओर से अदालत को यह भी बताया गया कि यह घटना राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य से सीधे जुड़ी नहीं है और इसे अवैध रेत खनन का मामला नहीं बताया गया है। राज्य की ओर से विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई में पेश की जाएगी।

