राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित प्रसिद्ध कृष्णधाम श्री संवलिया जी मंदिर में इस बार होली के अवसर पर खुले भंडार ने दान का नया रिकॉर्ड कायम कर दिया। फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी यानी 2 मार्च को मंदिर में कड़ी सुरक्षा के बीच दानपेटियां खोली गईं।
मंदिर की ओर से आयोजित विशेष आरती और भोग के बाद मंदिर मंडल के अधिकारियों की मौजूदगी में दान की गिनती का काम शुरू किया गया। अधिकारियों ने बताया कि इस बार मंदिर में लोगों द्वारा दिए गए दान की राशि पिछले वर्षों की तुलना में काफी बढ़ी है। दान में नकद राशि, सोने-चांदी के गहने और अन्य वस्तुएं शामिल हैं, जिनका कुल मूल्य भंडार के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा माना जा रहा है।
मंदिर प्रशासन के अनुसार, इस बार दान की रिकॉर्ड राशि भक्तों की बढ़ती आस्था और उदारता का प्रतीक है। मंदिर में आए श्रद्धालुओं ने अपने मनोकामना पूरी होने और सामाजिक भलाई के लिए दान दिया। अधिकारियों ने बताया कि दान की गिनती के दौरान सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी प्रकार की गड़बड़ी या चोरी की घटना न हो।
मंदिर के अध्यक्ष ने कहा कि श्री संवलिया जी मंदिर में होली और अन्य त्यौहारों के अवसर पर भंडार खोलने की परंपरा सदियों से चली आ रही है, लेकिन इस बार का रिकॉर्ड इस मंदिर के इतिहास में सबसे यादगार रहेगा। उन्होंने कहा, “भक्तों की आस्था और श्रद्धा ने इस बार भंडार को इतना विशाल बना दिया है कि यह हमारे लिए भी गर्व की बात है।”
विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक स्थलों पर इस तरह का दान समाज में परोपकार और सहयोग की भावना को बढ़ावा देता है। भक्तों द्वारा दिया गया दान न केवल मंदिर के रख-रखाव में काम आता है, बल्कि गरीब और जरूरतमंदों की मदद के लिए भी उपयोग किया जाता है।
मंदिर में उपस्थित श्रद्धालुओं ने बताया कि दान देने के साथ ही उन्हें आध्यात्मिक संतोष और आशीर्वाद की अनुभूति हुई। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर मंदिर की सफाई, सुरक्षा और व्यवस्था भी शानदार रही, जिससे भक्तों को सहज और सुरक्षित अनुभव मिला।
अंततः, श्री संवलिया जी मंदिर में होली पर खुले भंडार ने न केवल दान का नया रिकॉर्ड बनाया, बल्कि भक्तों की आस्था और समाज सेवा की भावना को भी सामने लाया। इस आयोजन ने यह साबित किया कि धार्मिक स्थलों में सामूहिक भक्ति और परोपकार की परंपरा आज भी जीवित है और लोगों को सकारात्मक संदेश और प्रेरणा देती है।

