रामगढ़ क्रेटर में मिले उल्कापिंड के संकेत, 16.5 करोड़ साल पुरानी घटना का पता
राजस्थान के बारां जिले के रामगढ़ गांव के पास स्थित ऐतिहासिक रामगढ़ क्रेटर को लेकर वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। भू-विज्ञानियों के हालिया शोध में क्रेटर की तलछटी में पाए गए सूक्ष्म चुंबकीय कणों ने यह संकेत दिए हैं कि लगभग 16.5 करोड़ साल पहले यह क्षेत्र लौह समृद्ध उल्कापिंड के धरती से टकराने का गवाह रहा था।
शोधकर्ताओं का कहना है कि ये सूक्ष्म चुंबकीय कण उस प्राचीन टकराव की पुष्टि करते हैं और इससे क्रेटर के निर्माण और भू-गतिकीय इतिहास को समझने में मदद मिलेगी। क्रेटर का अध्ययन करने से न केवल भूविज्ञानियों को पृथ्वी के प्राचीन भू-आकृति विज्ञान का ज्ञान मिलेगा, बल्कि यह यह भी पता चलेगा कि कैसे उल्कापिंड का प्रभाव स्थानीय पर्यावरण और भौगोलिक संरचनाओं पर पड़ा।
रामगढ़ क्रेटर को पहले भी ऐतिहासिक और वैज्ञानिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया था, लेकिन अब मिली इस नई खोज ने इसकी वैश्विक भूविज्ञान मानचित्र पर पहचान को और मजबूत किया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि आगे की खुदाई और परीक्षण से इस क्रेटर के बारे में और अधिक रहस्य उजागर होंगे।
स्थानीय प्रशासन और शोध संस्थान इस क्षेत्र को संरक्षित करने और वैज्ञानिक अध्ययन के लिए समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह खोज राजस्थान के भू-वैज्ञानिक और पर्यावरणीय महत्व को फिर से रेखांकित करती है।

