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कोटा में कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत से छात्र परेशान, मेस संचालकों को चुनौती

कोटा में कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत से छात्र परेशान, मेस संचालकों को चुनौती

देश की कोचिंग सिटी कोटा में कमर्शियल गैस सिलेंडर की किल्लत का असर अब सीधे स्टूडेंट्स की थाली तक पहुंच गया है। गैस की सप्लाई बाधित होने और दाम बढ़ने से कई मेस संचालकों को मेस चलाना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में कई जगहों पर गैस की जगह तंदूर का सहारा लिया जा रहा है, लेकिन छात्रों का कहना है कि उन्हें तंदूरी रोटी से ज्यादा तवा रोटी पसंद है।

कोटा में देशभर से हजारों छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। शहर में करीब 1200 से अधिक मेस और 3000 से ज्यादा हॉस्टल हैं, जहां रोजाना हजारों छात्र भोजन करते हैं। मेस संचालकों का कहना है कि कमर्शियल गैस सिलेंडर की उपलब्धता कम होने और दाम बढ़ने से उन्हें रोजाना खाना पकाने में परेशानी हो रही है।

मेस संचालकों का कहना है कि पहले उन्हें नियमित रूप से गैस सिलेंडर मिल जाते थे, लेकिन अब सिलेंडर की किल्लत के कारण उन्हें भारी कीमतों पर गैस खरीदनी पड़ रही है। कई मेस संचालक तंदूर का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन इससे रोटियों का स्वाद और क्वालिटी प्रभावित हो रही है। छात्रों ने भी कहा कि लंबे समय तक तंदूरी रोटी खाने से उन्हें परेशानी हो रही है और वे तवा रोटी को प्राथमिकता देना चाहते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि कोटा जैसे छात्र-प्रधान शहरों में गैस की आपूर्ति बाधित होने पर पूरे सिस्टम पर असर पड़ता है। न केवल छात्रों के लिए भोजन उपलब्ध कराना मुश्किल होता है, बल्कि मेस और हॉस्टल संचालकों की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ता है। इसके अलावा, बढ़े हुए गैस दामों से छोटे मेस संचालकों को संचालित करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

कोटा प्रशासन ने बताया कि उन्होंने सप्लाई बढ़ाने और सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उपाय किए हैं। हालांकि, बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के बीच समस्या का समाधान फिलहाल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। छात्र और मेस संचालक दोनों ही प्रशासन से जल्द प्रभावी कदम उठाने की उम्मीद कर रहे हैं।

स्थानीय व्यवसायियों और हॉस्टल संचालकों का कहना है कि यदि गैस सिलेंडरों की किल्लत बनी रही, तो उन्हें भोजन के विकल्प बदलने या मेस बंद करने पर विचार करना पड़ सकता है। इससे छात्रों की रोजाना की पढ़ाई और जीवनशैली पर भी असर पड़ेगा।

कोटा में यह समस्या यह भी उजागर करती है कि बड़े शहरों में उच्च मांग और सीमित संसाधनों के बीच आपूर्ति और कीमतों का संतुलन बनाए रखना कितना जरूरी है। छात्र-प्रधान शहरों में समय पर और पर्याप्त गैस की उपलब्धता न होना न केवल छात्रों की सुविधा पर असर डालता है, बल्कि पूरे शहर के व्यवसाय और रोजमर्रा की गतिविधियों को प्रभावित करता है।

अधिकारियों का कहना है कि वे नियमित तौर पर गैस की आपूर्ति और कीमतों की मॉनिटरिंग कर रहे हैं, ताकि मेस और हॉस्टल संचालकों को राहत मिल सके और छात्रों को रोजाना ताजा और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल सके।

इस बीच, कोटा के छात्रों और मेस संचालकों का कहना है कि जल्द से जल्द कमर्शियल गैस सिलेंडरों की नियमित आपूर्ति बहाल की जाए, ताकि शहर की कोचिंग और हॉस्टल व्यवस्था सुचारू रूप से चल सके।

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