बूंदी में बाल विवाह का चौंकाने वाला मामला, ‘नए घर’ ले जाने के बहाने 7 मासूम बच्चियों को बैठाया मंडप में
राजस्थान के बूंदी जिले से बाल विवाह का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने समाज को झकझोर कर रख दिया है। यहां ‘नए घर’ ले जाने का झांसा देकर 7 मासूम बच्चियों को मंडप में बैठा दिया गया। जब बच्चियों को इस बात की सच्चाई पता चली कि उनकी शादी कराई जा रही है, तो वे रो पड़ीं और शादी करने से साफ इनकार कर दिया।
जानकारी के अनुसार मामला जिले के एक ग्रामीण इलाके का बताया जा रहा है, जहां परंपरा और सामाजिक दबाव के नाम पर मासूम बच्चियों की कम उम्र में शादी कराने की तैयारी की जा रही थी। बताया जा रहा है कि बच्चियों को यह कहकर तैयार किया गया था कि उन्हें नए घर घूमने और रिश्तेदारों से मिलने ले जाया जा रहा है। मासूम बच्चियां भी बिना कुछ समझे सज-धज कर समारोह में पहुंच गईं।
लेकिन जब मंडप में बैठाने के बाद उन्हें शादी की रस्मों के बारे में जानकारी हुई तो बच्चियां घबरा गईं। सच्चाई सामने आते ही कई बच्चियां रोने लगीं और उन्होंने शादी से मना कर दिया। मासूमों की आंखों में डर और असमंजस साफ दिखाई दे रहा था। घटना की सूचना मिलने पर प्रशासन और बाल संरक्षण से जुड़ी एजेंसियां सक्रिय हुईं।
सूत्रों के मुताबिक, मामले की जानकारी मिलने के बाद स्थानीय प्रशासन, बाल कल्याण समिति और पुलिस टीम मौके पर पहुंची और हस्तक्षेप कर बाल विवाह रुकवाया गया। अधिकारियों ने बच्चियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और उनके परिजनों से पूछताछ शुरू की। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सामाजिक परंपरा और पारिवारिक दबाव के चलते यह आयोजन किया जा रहा था।
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बाल विवाह कानूनन अपराध है और इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मामले में आयोजकों और अभिभावकों की भूमिका की जांच की जा रही है। साथ ही बच्चियों की काउंसलिंग कराई जा रही है ताकि वे मानसिक रूप से सहज हो सकें।
यह घटना एक बार फिर ग्रामीण इलाकों में बाल विवाह जैसी कुप्रथा की मौजूदगी को उजागर करती है। सरकार और सामाजिक संगठनों द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद ऐसे मामले सामने आना चिंता का विषय है। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा और जागरूकता की कमी के कारण आज भी कई परिवार कम उम्र में बेटियों की शादी को सही मानते हैं।
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि मासूम बच्चियों को धोखे से शादी के मंडप तक ले जाना न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि उनके अधिकारों का हनन भी है। उन्होंने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल प्रशासन पूरे मामले की जांच में जुटा है। समय रहते हस्तक्षेप होने से सात मासूम बच्चियों का भविष्य अंधकार में जाने से बच गया। यह घटना समाज के लिए एक चेतावनी है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ सिर्फ कानून नहीं, बल्कि सामूहिक जागरूकता और सख्ती भी जरूरी है।

