राजस्थान में भीषण लू का कहर, कई जिलों में पारा 44 डिग्री पार, अगले 2-3 दिन और बढ़ेगी गर्मी
राजस्थान में भीषण गर्मी और लू का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के कई जिलों में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है। तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों का घरों से निकलना मुश्किल कर दिया है। मौसम विभाग ने अगले 2 से 3 दिनों में गर्मी और बढ़ने का अलर्ट जारी किया है, जिससे हालात और चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।
मौसम में लगातार बढ़ते तापमान के चलते दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म बनी हुई हैं। दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा देखने को मिल रहा है, जबकि बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर लोगों की आवाजाही कम हो गई है। तेज लू के थपेड़ों ने आमजन को बेहाल कर दिया है।
मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में लू का प्रभाव बना रहेगा और आगामी दिनों में तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। कुछ इलाकों में हीटवेव की स्थिति और गंभीर होने की संभावना जताई गई है। विभाग ने लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है।
भीषण गर्मी का असर सिर्फ आमजन ही नहीं, बल्कि पशु-पक्षियों और खेती पर भी दिखाई देने लगा है। जल स्रोतों पर दबाव बढ़ रहा है और कई इलाकों में पेयजल संकट की चिंता भी गहराने लगी है। ग्रामीण क्षेत्रों में तपती गर्मी के बीच लोग राहत के उपाय तलाशते नजर आ रहे हैं।
चिकित्सकों ने लू से बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज धूप में बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त पानी पिएं, हल्के और सूती कपड़े पहनें तथा बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें। गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के मामले बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 2 से 3 दिनों तक तापमान में और उछाल आ सकता है। ऐसे में कई जिलों में लू का असर और तीखा हो सकता है। प्रशासन भी गर्मी से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर है और जरूरी इंतजामों की समीक्षा की जा रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक मई-जून की शुरुआत से पहले ही इस तरह की गर्मी चिंता बढ़ाने वाली है। लगातार बढ़ता तापमान जलवायु बदलाव के असर की ओर भी इशारा कर रहा है।
फिलहाल राजस्थान भीषण गर्मी की चपेट में है और राहत के आसार फिलहाल कम नजर आ रहे हैं। मौसम विभाग के अलर्ट ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में गर्मी का प्रकोप और बढ़ सकता है, ऐसे में सतर्कता और बचाव ही सबसे बड़ा उपाय माना जा रहा है।

