जयपुर में सहवाग बोले— शोएब अख्तर को बहस पर बल्ले से दिया जवाब, देखें मजेदार Video
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व विस्फोटक ओपनर वीरेंद्र सहवाग ने एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज़ से सुर्खियां बटोर ली हैं। जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान सहवाग ने पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर के साथ चली पुरानी बहसों पर खुलकर बात की। सहवाग ने साफ शब्दों में कहा कि उन्होंने कभी भी जुबानी जंग में पड़ने की बजाय मैदान पर बल्ले से जवाब देना बेहतर समझा।
कार्यक्रम के दौरान जब सहवाग से पूछा गया कि शोएब अख्तर जैसे आक्रामक गेंदबाजों की बयानबाजी और उकसावे का वह कैसे सामना करते थे, तो सहवाग ने मुस्कुराते हुए कहा, “शोएब बहुत बोलते थे, लेकिन मैंने हमेशा सोचा कि जवाब शब्दों से नहीं, बल्ले से दिया जाए।” सहवाग का यह बयान सुनते ही वहां मौजूद दर्शकों ने जोरदार तालियां बजाईं।
सहवाग ने कहा कि क्रिकेट के मैदान पर उनका फोकस सिर्फ गेंद को देखना और रन बनाना होता था। उन्होंने याद करते हुए बताया कि शोएब अख्तर उस दौर के सबसे तेज और खतरनाक गेंदबाजों में से एक थे, लेकिन डरने की बजाय उन्होंने आक्रामक क्रिकेट को अपना हथियार बनाया। सहवाग बोले, “अगर आप तेज गेंदबाज से डर गए, तो फिर खेल खत्म। मैंने हमेशा सोचा कि अगर बॉल मेरी रेंज में है, तो मारूंगा।”
गौरतलब है कि भारत-पाकिस्तान मुकाबलों के दौरान सहवाग और शोएब अख्तर के बीच कई बार तीखी नोकझोंक देखने को मिली। शोएब अपनी रफ्तार और आक्रामक अंदाज के लिए मशहूर थे, वहीं सहवाग अपने बेखौफ बल्लेबाजी स्टाइल के लिए जाने जाते थे। दोनों के बीच की यह प्रतिद्वंद्विता क्रिकेट प्रेमियों के लिए हमेशा खास रही है।
सहवाग ने 2004 के पाकिस्तान दौरे का जिक्र करते हुए कहा कि उस सीरीज में उन्होंने दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने कहा, “जब आप सामने वाले की बातों पर ध्यान देने लगते हैं, तो अपना खेल बिगाड़ लेते हैं। मैंने खुद से कहा कि जो भी हो, रन बनाते रहो, वही सबसे बड़ा जवाब है।”
कार्यक्रम में सहवाग ने यह भी कहा कि आज के क्रिकेटरों को सोशल मीडिया और बयानबाजी से दूर रहकर अपने खेल पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने युवा खिलाड़ियों को सलाह दी कि मैदान के बाहर की बातें अस्थायी होती हैं, लेकिन प्रदर्शन हमेशा याद रखा जाता है।
जयपुर में सहवाग का यह बयान एक बार फिर उनके आत्मविश्वास और बेबाक सोच को दर्शाता है। क्रिकेट के जानकारों का मानना है कि यही सोच सहवाग को बाकी खिलाड़ियों से अलग बनाती थी। वह न सिर्फ गेंदबाजों पर हावी रहते थे, बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें पीछे छोड़ देते थे।

