वीडियो में देंखे केंद्र से राजस्थान के हक की बात क्यों नहीं उठाई? टीकाराम जूली ने सीएम की दिल्ली यात्रा पर उठाए सवाल
राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष Tika Ram Jully ने मुख्यमंत्री Bhajan Lal Sharma की दिल्ली यात्रा और केंद्रीय वित्त मंत्री से हुई मुलाकात को लेकर राज्य की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाए हैं। जूली ने कहा कि मुख्यमंत्री को शिष्टाचार भेंट तक सीमित रहने के बजाय राजस्थान के हक और अधिकारों की मजबूती से पैरवी करनी चाहिए थी।
जूली ने इस मुद्दे पर लिखित बयान जारी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने दिल्ली में केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman से मुलाकात की, लेकिन प्रदेश के आर्थिक हितों को लेकर कोई ठोस बात सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि राजस्थान को मिलने वाले केंद्रीय संसाधनों में कटौती जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर मुख्यमंत्री को जवाब मांगना चाहिए था।
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति सरकार के दावों से काफी अलग है। उनके अनुसार राज्य की आर्थिक सेहत बेहतर होने के सरकारी दावे वास्तविकता से कोसों दूर हैं और हकीकत में राजस्थान धीरे-धीरे वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा है।
टीकाराम जूली ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या मुख्यमंत्री ने केंद्रीय वित्त मंत्री से यह पूछा कि राजस्थान के हिस्से में हुई भारी कटौतियों का कारण क्या है। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास और जनकल्याण योजनाओं के लिए केंद्र से मिलने वाले संसाधनों का मुद्दा बेहद महत्वपूर्ण है और इसे मजबूती से उठाया जाना चाहिए था।
जूली ने राज्य सरकार के कर्ज को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता अक्सर कांग्रेस सरकार के समय लिए गए कर्ज का मुद्दा उठाते हैं, लेकिन मौजूदा सरकार की स्थिति भी उससे अलग नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग दो साल बनाम पांच साल का राग अलापते हैं, उन्हें सच्चाई सुननी चाहिए।
उन्होंने आंकड़े देते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार ने अपने पांच साल के कार्यकाल में लगभग 2.26 लाख करोड़ रुपए का कर्ज लिया था। वहीं मौजूदा सरकार केवल तीन साल में ही करीब 2.22 लाख करोड़ रुपए का कर्ज लेने की स्थिति में पहुंच रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि यही स्थिति जारी रही तो राज्य की वित्तीय स्थिति पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने राज्य सरकार से पारदर्शिता बरतने और आर्थिक प्रबंधन को लेकर स्पष्ट जानकारी देने की मांग की है।
जूली के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में आर्थिक मुद्दों को लेकर एक बार फिर बहस तेज होने की संभावना है। फिलहाल इस मामले पर राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। 📰

