113 दिन बाद खत्म हुआ ‘भैराना धाम बचाओ’ आंदोलन, कलेक्टर के आश्वासन पर संतों ने लिया निर्णय; रीको क्षेत्र के पुनर्नियोजन पर बनी सहमति
राजस्थान में चल रहा ‘भैराना धाम बचाओ’ आंदोलन 113 दिनों बाद समाप्त हो गया है। लंबे समय से आंदोलन कर रहे संतों और ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर के आश्वासन के बाद अपना धरना समाप्त करने का फैसला लिया। इस दौरान रीको औद्योगिक क्षेत्र के पुनर्नियोजन को लेकर सहमति बनी है।
आंदोलन खत्म होने के बाद संतों और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली। प्रशासन ने भी मामले को बातचीत के जरिए सुलझाने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
कलेक्टर के आश्वासन के बाद माने संत
जानकारी के अनुसार, भैराना धाम को बचाने की मांग को लेकर संत और ग्रामीण लंबे समय से आंदोलन कर रहे थे। उनकी मांग थी कि प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्र की योजना में धार्मिक स्थल और आसपास के क्षेत्र का ध्यान रखा जाए।
आंदोलन के 113वें दिन जिला प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत हुई। कलेक्टर की ओर से उचित कार्रवाई का भरोसा दिए जाने के बाद संतों ने आंदोलन समाप्त करने की घोषणा की।
रीको औद्योगिक क्षेत्र के पुनर्नियोजन पर सहमति
बैठक में रीको औद्योगिक क्षेत्र के प्रस्तावित प्लान को लेकर चर्चा हुई। प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच क्षेत्र के पुनर्नियोजन को लेकर सहमति बनी।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका उद्देश्य विकास का विरोध करना नहीं, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले भैराना धाम की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
लंबे समय से चल रहा था आंदोलन
‘भैराना धाम बचाओ’ आंदोलन को लेकर संतों और स्थानीय लोगों ने लगातार 113 दिनों तक धरना दिया। इस दौरान उन्होंने प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया।
आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों का समर्थन भी मिला।
प्रशासन ने जताई समाधान की उम्मीद
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्षों की सहमति से ऐसा समाधान निकाला जाएगा, जिससे क्षेत्र का विकास भी हो और धार्मिक स्थल की गरिमा भी बनी रहे।
आंदोलन समाप्त होने के बाद अब रीको क्षेत्र के नए प्लान और आगे की प्रक्रिया पर काम शुरू होने की उम्मीद है।

