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प्रधानमंत्री मोदी के दौरे से पहले पुष्कर में सैंड आर्ट बना आकर्षण का केंद्र, रेत पर उकेरी तस्वीर

राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित पुष्कर एक बार फिर अपनी रचनात्मक और सांस्कृतिक पहचान के कारण चर्चा में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 28 फरवरी को प्रस्तावित दौरे से पहले यहां रेतीले धोरों पर एक विशेष कलाकृति बनाई गई है, जिसने स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों का भी ध्यान आकर्षित किया है।  स्थानीय प्रशासन और कलाकारों ने मिलकर रेतीली धोरों पर यह कलाकृति तैयार की है। इसे खास तौर पर प्रधानमंत्री के दौरे के अवसर पर सजावट और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है। कलाकृति में पुष्कर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विशेषताओं को दर्शाने वाले डिजाइन शामिल हैं, जिससे यह न केवल एक दृश्य सौंदर्य का केंद्र बनी है, बल्कि क्षेत्र की रचनात्मकता और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक भी बन गई है।  स्थानीय लोग इस पहल से उत्साहित हैं और उन्होंने इसे जिले के पर्यटन विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। पुष्कर में रेतीली कला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की परंपरा काफी समय से रही है, और इस नई कलाकृति ने इसे एक नया आयाम दे दिया है। कलाकारों का कहना है कि यह कलाकृति पर्यटकों और स्थानीय लोगों को पर्यावरण और कला के प्रति जागरूक करने का भी माध्यम है।  पर्यटकों का कहना है कि रेतीली धोरों पर बनी यह कलाकृति उनकी यात्रा को और भी यादगार बना रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल पुष्कर को एक नया पर्यटन आकर्षण प्रदान करेगी और आने वाले वर्षों में यहां और अधिक सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देगी। साथ ही, प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के कारण इस कलाकृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान मिलेगा।  स्थानीय प्रशासन ने इस मौके पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं का पूरा ध्यान रखा है। कलाकृति के आसपास विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं और पर्यटकों के लिए मार्गदर्शन तथा सुविधाओं की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस कलाकृति को तैयार किया गया है ताकि रेतीली ढलानों और स्थानीय प्राकृतिक सौंदर्य को नुकसान न पहुंचे।  विशेषज्ञों का मानना है कि पुष्कर जैसी ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी में सांस्कृतिक और रचनात्मक प्रस्तुतियों का होना स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा देता है। यह पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा देती है, बल्कि स्थानीय कलाकारों और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी प्रदान करती है।  प्रधानमंत्री के दौरे से पहले तैयार की गई यह कलाकृति पुष्कर के पर्यटन स्थल के रूप में आकर्षण बढ़ाने के साथ-साथ राज्य की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करती है। स्थानीय लोग और पर्यटक इसे देखने के लिए सुबह-सुबह पहुंच रहे हैं और इसे सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं, जिससे पुष्कर का नाम और अधिक चमक रहा है।  इस तरह, पुष्कर में रेतीली धोरों पर उभरी यह कलाकृति न केवल सौंदर्य और रचनात्मकता का प्रतीक बनी है, बल्कि यह स्थानीय पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों में एक नई ऊर्जा और उत्साह का संदेश भी दे रही है।

राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित पुष्कर एक बार फिर अपनी रचनात्मक और सांस्कृतिक पहचान के कारण चर्चा में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 28 फरवरी को प्रस्तावित दौरे से पहले यहां रेतीले धोरों पर एक विशेष कलाकृति बनाई गई है, जिसने स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों का भी ध्यान आकर्षित किया है।

स्थानीय प्रशासन और कलाकारों ने मिलकर रेतीली धोरों पर यह कलाकृति तैयार की है। इसे खास तौर पर प्रधानमंत्री के दौरे के अवसर पर सजावट और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया है। कलाकृति में पुष्कर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विशेषताओं को दर्शाने वाले डिजाइन शामिल हैं, जिससे यह न केवल एक दृश्य सौंदर्य का केंद्र बनी है, बल्कि क्षेत्र की रचनात्मकता और सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक भी बन गई है।

स्थानीय लोग इस पहल से उत्साहित हैं और उन्होंने इसे जिले के पर्यटन विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। पुष्कर में रेतीली कला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की परंपरा काफी समय से रही है, और इस नई कलाकृति ने इसे एक नया आयाम दे दिया है। कलाकारों का कहना है कि यह कलाकृति पर्यटकों और स्थानीय लोगों को पर्यावरण और कला के प्रति जागरूक करने का भी माध्यम है।

पर्यटकों का कहना है कि रेतीली धोरों पर बनी यह कलाकृति उनकी यात्रा को और भी यादगार बना रही है। उन्होंने कहा कि यह पहल पुष्कर को एक नया पर्यटन आकर्षण प्रदान करेगी और आने वाले वर्षों में यहां और अधिक सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देगी। साथ ही, प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के कारण इस कलाकृति को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान मिलेगा।

स्थानीय प्रशासन ने इस मौके पर सुरक्षा और व्यवस्थाओं का पूरा ध्यान रखा है। कलाकृति के आसपास विशेष सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं और पर्यटकों के लिए मार्गदर्शन तथा सुविधाओं की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए इस कलाकृति को तैयार किया गया है ताकि रेतीली ढलानों और स्थानीय प्राकृतिक सौंदर्य को नुकसान न पहुंचे।

विशेषज्ञों का मानना है कि पुष्कर जैसी ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी में सांस्कृतिक और रचनात्मक प्रस्तुतियों का होना स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा देता है। यह पहल न केवल पर्यटन को बढ़ावा देती है, बल्कि स्थानीय कलाकारों और युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर भी प्रदान करती है।

प्रधानमंत्री के दौरे से पहले तैयार की गई यह कलाकृति पुष्कर के पर्यटन स्थल के रूप में आकर्षण बढ़ाने के साथ-साथ राज्य की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करती है। स्थानीय लोग और पर्यटक इसे देखने के लिए सुबह-सुबह पहुंच रहे हैं और इसे सोशल मीडिया पर साझा कर रहे हैं, जिससे पुष्कर का नाम और अधिक चमक रहा है।

इस तरह, पुष्कर में रेतीली धोरों पर उभरी यह कलाकृति न केवल सौंदर्य और रचनात्मकता का प्रतीक बनी है, बल्कि यह स्थानीय पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों में एक नई ऊर्जा और उत्साह का संदेश भी दे रही है।

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