सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने पर सचिन पायलट का केंद्र पर हमला, वीडियो में बोले- 'संवाद के बजाय दमन का रास्ता अपना रही सरकार'
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को अनशन स्थल से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराए जाने की कार्रवाई पर केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि सरकार को बातचीत का रास्ता अपनाना चाहिए था, लेकिन उसने संवाद के बजाय दमन की नीति अपनाई।
"गांधीवादी आंदोलन से बातचीत होनी चाहिए थी"
सचिन पायलट ने कहा कि सोनम वांगचुक अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से आंदोलन कर रहे थे। ऐसे में सरकार को उनसे बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास करना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने बातचीत के बजाय उन्हें जबरन अनशन स्थल से हटाकर अस्पताल में भर्ती कराया। पायलट ने कहा कि वांगचुक की मांगों पर विचार किया जा सकता था, लेकिन सरकार ने ऐसा करने के बजाय अलग रास्ता चुना।
"मानसून सत्र से पहले मुद्दा दबाने की कोशिश"
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि संसद का मानसून सत्र शुरू होने से पहले इस मुद्दे को दबाने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई। उनके मुताबिक, सरकार नहीं चाहती कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा हो।उन्होंने कहा कि यदि किसी लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने वालों के साथ इस तरह का व्यवहार किया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
"देश का युवा जवाब मांग रहा है"
सचिन पायलट ने कहा कि देशभर के युवा शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उनके अनुसार, कांग्रेस लगातार छात्रों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को सुन रही है और उन्हें उठाने का प्रयास कर रही है।उन्होंने यह भी कहा कि राहुल गांधी लगातार युवाओं से संवाद कर रहे हैं और देश का नौजवान सरकार से जवाब चाहता है। पायलट के अनुसार, सरकार को इन सवालों का जवाब देने के लिए आगे आना चाहिए।
सरकार पर लगाए संवाद से बचने के आरोप
पायलट ने आरोप लगाया कि सरकार विरोध की आवाज सुनने के बजाय उसे दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना नागरिकों का अधिकार है और सरकार को ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ संवाद स्थापित करना चाहिए।
वांगचुक की मांगों को लेकर जारी है विवाद
सोनम वांगचुक पिछले कई दिनों से शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों और अन्य मांगों को लेकर अनशन पर थे। उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बाद उन्हें दिल्ली पुलिस द्वारा अस्पताल ले जाया गया, जिसके बाद इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं।फिलहाल, इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से सचिन पायलट के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, सोनम वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने और उनकी मांगों को लेकर राजनीतिक बहस लगातार जारी है।

