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जयपुर की हवा सुधारने 344 करोड़ रुपये, 15वें वित्त आयोग से मिली मदद

जयपुर की हवा सुधारने 344 करोड़ रुपये, 15वें वित्त आयोग से मिली मदद

राजस्थान की राजधानी जयपुर की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए अब तक 344.70 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह जानकारी राज्य सरकार ने गुरुवार (26 फरवरी) को राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान दी।

सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 15वें वित्त आयोग के माध्यम से जयपुर नगर निगम को यह वित्तीय सहायता प्रदान की है। इसका मुख्य उद्देश्य राजधानी की वायु गुणवत्ता में सुधार और प्रदूषण नियंत्रण करना है।

राज्य सरकार ने बताया कि यह राशि विभिन्न परियोजनाओं में उपयोग की जाएगी, जिनमें स्मॉग नियंत्रण, वायु निगरानी, सार्वजनिक परिवहन सुधार, हरित क्षेत्र विकास और उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि इससे जयपुर के नागरिकों को साफ और सुरक्षित हवा मिलने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि शहरों में वायु प्रदूषण बढ़ने के पीछे वाहनों की संख्या, उद्योग, निर्माण कार्य और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रमुख कारण हैं। ऐसे में वित्त आयोग से मिली सहायता से नगर निगम इन क्षेत्रों में सुधार कर सकता है और वायु गुणवत्ता को बेहतर बना सकता है।

वर्तमान में जयपुर की हवा में PM2.5 और PM10 कणों की मात्रा राष्ट्रीय मानकों से अधिक पाई जा रही है। इसके कारण बच्चों, बुजुर्गों और हृदय व फेफड़ों की बीमारियों से पीड़ित लोगों में जोखिम बढ़ गया है। ऐसे में इस राशि का उपयोग शहर की हवा को स्वस्थ और सांस लेने योग्य बनाने में किया जाएगा।

नगर निगम के अधिकारी ने बताया कि योजना के तहत सड़कों पर धूल कम करने, हरित पट्टी विकसित करने, उद्योगों में वायु शोधन यंत्र लगाने और सार्वजनिक परिवहन को स्वच्छ बनाने जैसी गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके अलावा, स्मार्ट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग सिस्टम भी शहर में लगाया जाएगा, जिससे प्रदूषण का रीयल टाइम डेटा मिल सके।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह राशि केवल खर्च करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि सख्त निगरानी और जनता की सहभागिता भी जरूरी है। लोगों को भी प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छता में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

अंततः, जयपुर में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए 15वें वित्त आयोग से मिली 344.70 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता राजधानी के लिए एक बड़ी राहत साबित होगी। राज्य सरकार और नगर निगम इस योजना के प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से शहरवासियों को स्वस्थ, साफ और सांस लेने योग्य हवा उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं।

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