Samachar Nama
×

राजस्थान के बजट में बढ़ते कर्ज और हवाई अनुमान: आमजन को रेवड़ियां, प्रदेश की कमर पर बोझ

राजस्थान के बजट में बढ़ते कर्ज और हवाई अनुमान: आमजन को रेवड़ियां, प्रदेश की कमर पर बोझ

राजस्थान में सालाना बजट में वर्षों से राजस्व के हवाई अनुमान लगाकर आमजन को आकर्षित करने की रणनीति अपनाई जा रही है। दूसरे प्रदेशों की तर्ज पर राज्य सरकार द्वारा फ्री बीज, सस्ते रियायती उपाय और घोषणाओं के माध्यम से जनता का दिल जीतने का प्रयास किया जाता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इसी रणनीति के चलते राज्य का कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

राज्य के वित्तीय विश्लेषकों ने बताया कि बजट में अक्सर ऐसे अनुमान लगाए जाते हैं, जो वास्तविक राजस्व संग्रह से अधिक होते हैं। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं के लिए जनताकुल भत्ता और आकर्षक घोषणाएं पेश करना होता है। लेकिन वास्तविकता में राजस्व इस अनुमान के अनुरूप नहीं होता और राज्य को अतिरिक्त उधारी लेने की जरूरत पड़ती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रक्रिया लंबे समय तक चलती रही, जिससे प्रदेश का कर्ज और वित्तीय दबाव बढ़ गया है। कर्ज बढ़ने का सीधा असर प्रदेश की विकास योजनाओं, प्रशासनिक खर्चों और आमजन पर पड़ता है। उदाहरण के लिए, यदि फ्री बीज जैसी योजनाओं के लिए बजट में अधिक आवंटन किया गया है लेकिन राजस्व वसूली अनुमान से कम रही, तो सरकार को बैंक और वित्तीय संस्थानों से उधारी लेना पड़ता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस रणनीति का लाभ राजनीतिक दृष्टि से जरूर मिलता है, क्योंकि जनता को तत्काल लाभ दिखता है। लेकिन दीर्घकालिक रूप से राज्य की वित्तीय स्थिति कमजोर होती है और विकासात्मक परियोजनाओं के लिए संसाधन सीमित हो जाते हैं।

आर्थिक विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बजट में सटीक राजस्व अनुमान और वित्तीय अनुशासन को प्राथमिकता दी जाए। साथ ही, घोषणाओं और योजनाओं को इस तरह से लागू किया जाए कि वे राज्य के वित्तीय संतुलन को प्रभावित न करें।

राज्य सरकार ने इस विषय पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि, नीति निर्धारक यह समझते हैं कि आगामी बजट में वित्तीय अनुशासन और कर्ज नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना आवश्यक होगा।

अंततः, राजस्थान में वर्षों से बजट में हवाई अनुमान और रेवड़ियों के जरिए जनता का आकर्षण बढ़ाने का प्रयास होता रहा है, लेकिन बढ़ते कर्ज ने राज्य की कमर तोड़ दी है। विशेषज्ञों की नजर में अब जरूरत है सतर्क और सटीक बजट नियोजन की, ताकि राज्य की अर्थव्यवस्था दीर्घकालिक रूप से स्थिर और मजबूत बनी रहे।

Share this story

Tags