रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी को 165 दिन रखा डिजिटल अरेस्ट, वीडियो में जाने सुप्रीम कोर्ट और ATS का डर दिखाकर ठगे 66 लाख
राजस्थान के भरतपुर में साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने एक रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी को 165 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखकर उनसे 66 लाख रुपये ठग लिए। आरोपियों ने पीड़ित को सुप्रीम कोर्ट और एटीएस का डर दिखाया और दावा किया कि उनका नाम एक गंभीर आपराधिक मामले में सामने आया है। इसके बाद बैंक खाते में मौजूद रकम के सत्यापन के नाम पर पैसे अपने खातों में ट्रांसफर करवा लिए।
मामले में भरतपुर साइबर थाना पुलिस ने रविवार को उत्तर प्रदेश के संभल से ओमपाल नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक इस मामले में तीन अन्य आरोपी भूपेंद्र यादव, फारुख अहमद परी और संदीप मात्रा को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क और ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों की जांच कर रही है।
17 अगस्त 2025 को आया था पहला फोन
भरतपुर के एसपी राजेश मीणा के अनुसार, पीड़ित रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी ने 2 फरवरी 2026 को साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने पुलिस को बताया कि 17 अगस्त 2025 को उनके पास एक अज्ञात नंबर से फोन आया था।बातचीत के दौरान साइबर ठगों ने धीरे-धीरे पीड़ित से उनके आधार कार्ड समेत अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जानकारी हासिल कर ली। इसके बाद आरोपियों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर उनसे संपर्क किया और एक झूठी कहानी सुनाई।
अपराधी के पास दस्तावेज मिलने का दावा
ठगों ने पीड़ित को बताया कि उन्होंने एक अपराधी को गिरफ्तार किया है और उसके पास से उनके महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं। इस बात से पीड़ित को डराने की कोशिश की गई।आरोपियों ने इसके बाद उनके बैंक खाते से जुड़ी जानकारी भी हासिल कर ली। ठगों ने दावा किया कि जांच के लिए बैंक खाते में मौजूद रकम का वेरिफिकेशन जरूरी है। पीड़ित ने जब पैसे ट्रांसफर करने से इनकार किया तो आरोपियों ने दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट का डर दिखाकर बनाया दबाव
साइबर ठगों ने खुद को कानून और जांच एजेंसियों से जुड़ा बताकर पीड़ित को लगातार डराया। जब बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर करने की मांग पूरी नहीं हुई तो आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने और गिरफ्तारी का डर दिखाया।पुलिस के अनुसार, इसी तरह धमकाकर और मानसिक दबाव बनाकर रिटायर्ड शिक्षा अधिकारी को करीब 165 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा गया। इस दौरान आरोपी वीडियो कॉल और फोन के माध्यम से पीड़ित पर निगरानी बनाए रखते थे और उन्हें किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क करने से रोकते थे।
66 लाख रुपये करवाए ट्रांसफर
डिजिटल अरेस्ट के दौरान आरोपियों ने पीड़ित को लगातार विश्वास दिलाया कि वह किसी बड़े आपराधिक मामले में फंस गए हैं। इसी डर और दबाव का फायदा उठाकर ठगों ने बैंक खाते में मौजूद रकम के सत्यापन के नाम पर पैसे ट्रांसफर करवाए।आरोपियों ने पीड़ित से कुल 66 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। जब उन्हें ठगी का अहसास हुआ तो उन्होंने पुलिस से संपर्क किया और मामला दर्ज कराया।
पुलिस ने एक और आरोपी को किया गिरफ्तार
मामले की जांच के दौरान भरतपुर साइबर थाना पुलिस ने ठगी से जुड़े आरोपियों की पहचान शुरू की। पुलिस ने रविवार को उत्तर प्रदेश के संभल से ओमपाल को गिरफ्तार किया। इससे पहले मामले में भूपेंद्र यादव, फारुख अहमद परी और संदीप मात्रा की गिरफ्तारी हो चुकी है।पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने कितने लोगों को इसी तरीके से निशाना बनाया और ठगी की रकम किन-किन खातों में ट्रांसफर की गई। साथ ही साइबर ठगी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश की जा रही है।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बढ़ रहे साइबर अपराध
इस मामले ने एक बार फिर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली साइबर ठगी को लेकर चिंता बढ़ा दी है। ठग अक्सर खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी, एटीएस या अदालत से जुड़ा अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। इसके बाद गिरफ्तारी का भय दिखाकर उनसे पैसे ट्रांसफर करवाने की कोशिश करते हैं।पुलिस लगातार लोगों से अपील करती रही है कि किसी भी जांच एजेंसी का अधिकारी फोन या वीडियो कॉल पर बैंक खाते की रकम ट्रांसफर करने या उसका वेरिफिकेशन कराने के नाम पर पैसे नहीं मांगता। ऐसे किसी भी दबाव में आने के बजाय तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।

