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जिले में त्रिस्तरीय पंचायतीराज चुनाव की आरक्षण सूची जारी, प्रधान और जिला परिषद सदस्यों के वार्ड तय

जिले में त्रिस्तरीय पंचायतीराज चुनाव की आरक्षण सूची जारी, प्रधान और जिला परिषद सदस्यों के वार्ड तय

जिला प्रशासन ने 2026 के त्रिस्तरीय पंचायतीराज चुनावों को लेकर पंचायत समिति प्रधानों, जिला परिषद सदस्यों और वार्डों के आरक्षण की अंतिम सूची जारी कर दी है। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी गौरव अग्रवाल की ओर से जारी आदेश के बाद जिले में चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। आरक्षण सूची जारी होने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में संभावित उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की तैयारियां भी तेज होने की संभावना है।

प्रशासन की ओर से जारी अंतिम सूची में पंचायत समिति प्रधान पदों के साथ जिला परिषद सदस्य पदों और अलग-अलग वार्डों के लिए आरक्षण की स्थिति निर्धारित की गई है। आरक्षण का निर्धारण अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, सामान्य वर्ग और महिलाओं के लिए निर्धारित नियमों के आधार पर किया गया है।

पंचायत समिति प्रधानों के आरक्षण के बाद अब संबंधित पंचायत समितियों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे दावेदार अपनी रणनीति बनाने में जुटेंगे। वहीं जिला परिषद के वार्डों का आरक्षण तय होने से जिला स्तर पर भी संभावित प्रत्याशियों की तस्वीर सामने आने लगी है। कई क्षेत्रों में आरक्षण बदलने से पुराने दावेदारों को नए वार्डों पर नजर रखनी पड़ सकती है।

जिला प्रशासन ने आरक्षण की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और पूर्व में निकाली गई लॉटरी के आधार पर पूरी की है। अंतिम सूची जारी होने के बाद अब किसी पद या वार्ड के आरक्षण को लेकर स्थिति स्पष्ट मानी जा रही है। प्रशासन ने चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए हैं।

आरक्षण सूची जारी होने का असर ग्रामीण इलाकों की राजनीतिक गतिविधियों पर भी देखने को मिलेगा। संभावित प्रत्याशी अब अपने-अपने क्षेत्र में समर्थकों और कार्यकर्ताओं से संपर्क बढ़ाने की तैयारी करेंगे। वहीं राजनीतिक दल भी आरक्षित सीटों के हिसाब से उम्मीदवारों के नामों पर मंथन शुरू कर सकते हैं।

त्रिस्तरीय पंचायतीराज चुनावों में पंचायत समिति प्रधान, जिला परिषद सदस्य और वार्ड पंचों के पदों का आरक्षण महत्वपूर्ण माना जाता है। आरक्षण तय होने के बाद ही कई दावेदारों की चुनावी संभावनाएं स्पष्ट होती हैं। जिला प्रशासन की अंतिम सूची के बाद अब ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी हलचल और तेज होने की उम्मीद है।

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