17 साल पुराने मामले में पूर्व IAS अधिकारियों को राहत, राजस्थान हाईकोर्ट ने FIR की रद्द
राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने करीब 17 साल पुराने एक मामले में पूर्व आईएएस अधिकारियों संजय दीक्षित और रणजीत सिंह को बड़ी राहत दी है। अदालत ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है।
यह फैसला जस्टिस अनूप ढंढ की एकलपीठ ने संजय दीक्षित और रणजीत सिंह द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के बाद सुनाया। दोनों अधिकारियों ने अपनी याचिका में एफआईआर को निरस्त करने की मांग की थी।
मामला करीब 17 वर्ष पुराना बताया जा रहा है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से एफआईआर को चुनौती देते हुए विभिन्न कानूनी और तथ्यात्मक आधार अदालत के समक्ष रखे गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने एफआईआर को रद्द करने का आदेश पारित किया।
अदालत के इस फैसले के बाद दोनों पूर्व आईएएस अधिकारियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। एफआईआर निरस्त होने से इस मामले में उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्रवाई पर भी असर पड़ेगा।
हालांकि, अदालत के विस्तृत आदेश में किन आधारों पर एफआईआर को रद्द किया गया, इसकी विस्तृत जानकारी आदेश की प्रति उपलब्ध होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में हाईकोर्ट साक्ष्यों, मामले के तथ्यों और कानूनी प्रावधानों का परीक्षण करने के बाद ही एफआईआर रद्द करने का निर्णय देता है।
यह मामला लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया में लंबित था। अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद इस प्रकरण में एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ आ गया है।
राजस्थान हाईकोर्ट के इस आदेश को प्रशासनिक और कानूनी हलकों में भी अहम माना जा रहा है। फिलहाल सभी की नजर अदालत के विस्तृत आदेश पर है, जिससे यह स्पष्ट होगा कि किन कानूनी कारणों के आधार पर एफआईआर को रद्द किया गया।

