भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 6 फरवरी को हुई मॉनीटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया। इसका मतलब है कि बैंकों के लिए कर्ज की लागत में कोई बदलाव नहीं होगा और आम लोगों की ईएमआई (EMI) भी बढ़ेगी नहीं।
आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों और मुद्रास्फीति की दर को ध्यान में रखते हुए रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, "इस बार की नीति से स्पष्ट है कि बैंकिंग प्रणाली और ग्राहक दोनों के लिए स्थिरता बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है।"
जानकारी के अनुसार, RBI ने दिसंबर 2025 में रेपो रेट को 0.25 प्रतिशत घटाकर 5.25 प्रतिशत किया था। रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब RBI इस दर को घटाता है, तो बैंकों को सस्ता कर्ज मिलता है और वे इस फायदा को ग्राहकों तक पहुंचाते हैं। इससे आम लोग, व्यवसाय और घर खरीदने वाले लोग सस्ते लोन का लाभ उठा सकते हैं। वहीं, जब RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो कर्ज महंगा हो जाता है और ईएमआई बढ़ती है।
इस बार रेट में बदलाव न होने का मतलब है कि मौजूदा आर्थिक स्थिरता बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, मुद्रास्फीति (Inflation) और आर्थिक विकास (GDP Growth) को संतुलित करने के लिए RBI ने स्थिर रेट का निर्णय लिया है। मालूम हो कि पिछले साल भारत में महंगाई की दर में उतार-चढ़ाव देखने को मिला था, लेकिन अब स्थिति नियंत्रण में है।
फाइनेंस एक्सपर्ट्स का कहना है कि रेपो रेट स्थिर रहने से न केवल उपभोक्ता बल्कि छोटे और मझोले व्यवसायों को भी फायदा मिलेगा। इसका सीधा असर उनकी फाइनेंसिंग लागत पर पड़ेगा, जिससे व्यवसायी आसानी से कर्ज ले सकते हैं और विस्तार के काम कर सकते हैं। वहीं, होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई भी इसी दर पर बनी रहेंगी।
मौजूदा आर्थिक माहौल में यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि कई घरेलू और वैश्विक कारक भारतीय बाजार पर असर डाल सकते हैं। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक मुद्रास्फीति और घरेलू मांग में बदलाव को देखते हुए MPC ने सावधानीपूर्वक फैसला किया है।
आरबीआई की यह नीति वित्तीय स्थिरता के साथ-साथ आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण संकेत है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर को पर्याप्त तरलता (Liquidity) प्रदान की जाएगी और उन्हें आसान शर्तों पर लोन उपलब्ध होंगे।
इस फैसले के बाद, वित्तीय विशेषज्ञों और निवेशकों ने इसे सकारात्मक संकेत माना है। उनका कहना है कि स्थिर रेपो रेट से आर्थिक गतिविधियों में बढ़ोतरी संभव है और आम जनता को वित्तीय योजना बनाने में आसानी होगी।
इस तरह, 6 फरवरी की MPC बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि RBI की प्राथमिकता मौद्रिक स्थिरता बनाए रखना और अर्थव्यवस्था को संतुलित गति से आगे बढ़ाना है।

