कांकरोली द्वारकाधीश मंदिर में ‘राल महोत्सव’ शुरू — आयुर्वेदिक धुएं से मिलेगा स्वास्थ्य लाभ
होली के पूर्व आठ दिनों को मान्यता प्राप्त धार्मिक पर्व होलाष्टक के बीच आज द्वारकाधीश मंदिर में विशेष “राल महोत्सव” का आयोजन शुरू हो गया है। यह उत्सव होलाष्टक 2026 के मौके पर मनाया जा रहा है, जिसमें पांच आयुर्वेदिक पदार्थों के मिश्रण से उत्पन्न धुआं भक्तों और पर्यटकों को शारीरिक लाभ प्रदान करता है — खासकर कफ और सांस की समस्याओं में राहत देने के लिए यह उपाय चर्चित है।
📿 ‘राल महोत्सव’ का धार्मिक और स्वास्थ्य‑मूलक महत्व
द्वारकाधीश मंदिर में होलाष्टक के दौरान आयोजित इस महोत्सव में आयुर्वेदिक चीजों का मिश्रण गोवर्धन पूजा चौक के दो बड़े मसालों पर डाला जाता है, जिससे धुएं के बड़े‑बड़े बादल उठते हैं। स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस धुएं को साँस द्वारा अंदर लेने से कफ की परेशानी कम होने का लाभ मिलता है और यह फेफड़ों तथा श्वसन पथ के लिए उपयोगी माना जाता है।
परंपरा के अनुसार यह राल महोत्सव भक्ति और आराधना का भी प्रतीक है, जिसमें भक्त ठाकुर द्वारकाधीश को होली के रंगों से खुश करने के लिए रसिया गाया जाता है। इस उत्सव की भक्ति‑परंपरा और आयुर्वेदिक आयाम दोनों इसे अनोखा बनाते हैं।
📅 होलाष्टक 2026 क्या है?
होलाष्टक हिंदू धर्म में होली पर्व के ठीक आठ दिन पहले से आरंभ होने वाला काल है, जिसे विशेष धार्मिक मान्यता प्राप्त है। यह अवधि 24 फरवरी 2026 से शुरू होकर 3 मार्च तक चलती है, और इस दौरान मांगलिक व शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय शारीरिक उन्नति, संयम और भक्ति की ऊर्जा अधिक होती है, इसलिए कर्मकांड या शुभ आयोजनों के बजाय पूजन‑पाठ, ध्यान और सेवा‑कार्य को प्राथमिकता दी जाती है।

