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गणतंत्र दिवस परेड में राजस्थान की झांकी ने बिखेरा मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श, वीडियो में देखें उस्ता कला ने जीता देश का दिल

गणतंत्र दिवस परेड में राजस्थान की झांकी ने बिखेरा मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श, वीडियो में देखें उस्ता कला ने जीता देश का दिल

दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित गणतंत्र दिवस परेड में इस बार राजस्थान की झांकी ने दर्शकों का मन मोह लिया। बीकानेर की विश्वविख्यात उस्ता कला को केंद्र में रखकर तैयार की गई राजस्थान की झांकी ने अपनी विशिष्ट शिल्पकला, सांस्कृतिक वैभव और जीवंत प्रस्तुति के जरिए राष्ट्रीय मंच पर अमिट छाप छोड़ी। झांकी को देखने के लिए कर्तव्य पथ पर मौजूद दर्शक देर तक तालियां बजाते नजर आए।

“राजस्थान मरुस्थल का स्वर्ण स्पर्श” विषय पर आधारित इस झांकी ने मरुस्थलीय प्रदेश की कला, संस्कृति और परंपरा को बेहद प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। झांकी के आगे के हिस्से में राजस्थान के प्रसिद्ध लोक वाद्य रावणहट्टा का वादन करते एक कलाकार की 180 डिग्री घूमती हुई प्रतिमा लगाई गई थी। यह प्रतिमा न केवल तकनीकी दृष्टि से अनूठी रही, बल्कि राजस्थान की लोक संगीत परंपरा को भी जीवंत रूप में दर्शाती नजर आई।

झांकी के इस हिस्से के दोनों ओर उस्ता कला से सजी सुराही, कुप्पी और दीपक आकर्षक फ्रेमों में लगाए गए थे। सोने की आभा लिए इन कलाकृतियों ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बारीक नक्काशी, सुनहरी रंगत और पारंपरिक डिजाइन ने उस्ता कला की महीन शिल्पकला को बखूबी प्रदर्शित किया। झांकी का यह अग्रभाग करीब 13 फीट ऊंचा था, जो दूर से ही अपनी भव्यता के कारण नजरों में आ गया।

उस्ता कला बीकानेर की एक पारंपरिक और विरासत से जुड़ी शिल्पकला है, जिसमें सोने की पॉलिश और बारीक चित्रकारी के जरिए लकड़ी, चमड़े और मिट्टी के पात्रों को सजाया जाता है। राजस्थान की झांकी के माध्यम से इस कला को देशभर के लोगों के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया, जिसे दर्शकों और कला प्रेमियों ने खूब सराहा।

झांकी के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि राजस्थान केवल किलों, रेगिस्तान और पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की लोक कला, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक विरासत भी देश की पहचान का अहम हिस्सा हैं। राजस्थान की इस प्रस्तुति ने गणतंत्र दिवस परेड में शामिल अन्य झांकियों के बीच अपनी अलग पहचान बनाई।

कर्तव्य पथ पर मौजूद देश-विदेश के मेहमानों, गणमान्य व्यक्तियों और आम नागरिकों ने राजस्थान की झांकी की जमकर प्रशंसा की। सोशल मीडिया पर भी झांकी की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल होते नजर आए।

कुल मिलाकर, गणतंत्र दिवस के इस ऐतिहासिक अवसर पर राजस्थान की झांकी ने न केवल राज्य की सांस्कृतिक समृद्धि को उजागर किया, बल्कि बीकानेर की उस्ता कला को वैश्विक मंच पर एक नई पहचान भी दिलाई।

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