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राजस्थान की कला-संस्कृति अब सड़कों पर दिखेगी, फुटेज में देंखे 3500 किमी का सफर तय करेगी खास आर्ट कार

राजस्थान की कला-संस्कृति अब सड़कों पर दिखेगी, फुटेज में देंखे 3500 किमी का सफर तय करेगी खास आर्ट कार

राजस्थान की कला, संस्कृति, लोक परंपराओं और शिल्प की समृद्ध विरासत अब केवल संग्रहालयों, हवेलियों और कला दीर्घाओं तक सीमित नहीं रहेगी। प्रदेश की विविध सांस्कृतिक पहचान को लोगों तक पहुंचाने के लिए जयपुर की संस्था कार्टिस्ट एक अनोखी पहल शुरू करने जा रही है। संस्था के नए इनिशिएटिव ‘स्टोरीज ऑफ इंडियन सिटीज’ का पहला चैप्टर राजस्थान से शुरू होगा। इसके तहत एक विशेष आर्ट कार प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में घूमेगी और राजस्थान की कला एवं लोक संस्कृति की कहानियों को लोगों के सामने लाएगी।

4 से 23 सितंबर तक चलेगी यात्रा

‘स्टोरीज ऑफ इंडियन सिटीज’ के राजस्थान चैप्टर के तहत टीम 4 से 23 सितंबर तक प्रदेश के अलग-अलग इलाकों की यात्रा करेगी। इस दौरान करीब 3500 किलोमीटर का सफर तय किया जाएगा। यात्रा का उद्देश्य राजस्थान के विभिन्न अंचलों की कला, शिल्प, खान-पान, वास्तुकला, लोक संगीत, परंपराओं और यहां रहने वाले लोगों की अनकही कहानियों को दस्तावेजित करना है।टीम यात्रा के दौरान स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों से मुलाकात करेगी। साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों की विशिष्ट कलाओं और परंपराओं को समझकर उन्हें व्यापक स्तर पर सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।

राजस्थान की कला का चलता-फिरता कैनवास होगी कार

इस पूरी पहल की सबसे खास पहचान एक विशेष आर्ट कार होगी। राजस्थान की विभिन्न कला परंपराओं से तैयार की जा रही यह कार सिर्फ यात्रा का साधन नहीं होगी, बल्कि अपने आप में प्रदेश की कला और संस्कृति का चलता-फिरता कैनवास होगी।कार के बाहरी और अंदरूनी हिस्सों को राजस्थान की अलग-अलग लोक कलाओं और पारंपरिक शिल्प से सजाया जाएगा। ऐसे में जिस भी शहर, कस्बे या गांव से यह कार गुजरेगी, वहां लोगों को राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता की झलक देखने को मिलेगी।

हर अंचल की अलग कहानी

राजस्थान भौगोलिक और सांस्कृतिक रूप से बेहद विविध प्रदेश है। यहां हर क्षेत्र की अपनी कला, बोली, खान-पान, संगीत, पहनावा और लोक परंपराएं हैं। रेगिस्तानी इलाकों से लेकर मेवाड़, हाड़ौती, ढूंढाड़ और शेखावाटी तक अलग-अलग क्षेत्रों की सांस्कृतिक पहचान देखने को मिलती है।आर्ट कार के जरिए इस विविधता को एक ही यात्रा में समेटने का प्रयास किया जाएगा। टीम स्थानीय लोगों और कलाकारों से बातचीत कर उन कहानियों को सामने लाएगी, जो अक्सर बड़े सांस्कृतिक आयोजनों या पर्यटन स्थलों की चमक के पीछे छूट जाती हैं।

सड़कों के जरिए संस्कृति से जुड़ेगा आम आदमी

इस पहल की खासियत यह है कि कला को लोगों तक पहुंचाने के लिए दर्शकों को किसी संग्रहालय या कला दीर्घा तक जाने की जरूरत नहीं होगी। आर्ट कार खुद लोगों के बीच पहुंचेगी। रास्ते में मिलने वाले लोगों के लिए यह कार राजस्थान की जीवंत कला परंपराओं को करीब से देखने का माध्यम बनेगी।कार्टिस्ट की इस पहल के जरिए राजस्थान की पारंपरिक कलाओं, स्थानीय शिल्पकारों और लोक परंपराओं को नई पहचान मिलने की उम्मीद है। 4 सितंबर से शुरू होने वाली यह यात्रा 23 सितंबर तक प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने और उसकी कहानियों को दस्तावेजित करने का प्रयास करेगी।

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