राजस्थान-पाक बॉर्डर बना ड्रग्स तस्करी का बड़ा रूट, वीडियो में जाने 5 किलो ड्रग्स पर 'फ्री पिस्टल' का ऑफर
राजस्थान से सटा पाकिस्तान बॉर्डर अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी का बड़ा मार्ग बनता जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक पंजाब और राजस्थान के कई गैंगस्टर्स ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी और आतंकी संगठनों के साथ मिलकर नशे की तस्करी का एक संगठित नेटवर्क खड़ा कर लिया है, जिसके जरिए भारत समेत कई देशों तक ड्रग्स पहुंचाई जा रही है।
एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) के सूत्रों के अनुसार ड्रग्स की मांग बढ़ाने और तस्करी के नेटवर्क को मजबूत करने के लिए आकर्षक ऑफर तक दिए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी संगठन और तस्कर भारत में 5 किलोग्राम ड्रग्स की खरीद पर एक पिस्टल मुफ्त देने जैसी रणनीति अपना रहे हैं।
ड्रग्स के साथ बढ़ रही हथियारों की तस्करी
सूत्रों का कहना है कि इस तरह के ऑफर के कारण पाकिस्तान से ड्रग्स के साथ-साथ हथियारों की तस्करी में भी तेजी आई है। ड्रोन और अन्य माध्यमों से सीमा पार से भेजे जा रहे हथियार भारतीय तस्करों और गैंगस्टर्स तक पहुंच रहे हैं। इसके बाद इन हथियारों को भारत से अन्य देशों तक पहुंचाकर लाखों रुपये में बेचा जा रहा है।
गैंगस्टर्स और आतंकी संगठनों का गठजोड़
जांच एजेंसियों के मुताबिक राजस्थान और पंजाब के कुछ आपराधिक गिरोह पाकिस्तान स्थित नेटवर्क के संपर्क में हैं। यह गठजोड़ न केवल नशे के कारोबार को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। ड्रग्स से होने वाली कमाई का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों और संगठित अपराध को वित्तीय मदद पहुंचाने में किए जाने की आशंका भी जताई जा रही है।
सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट
सीमा सुरक्षा और खुफिया एजेंसियां लगातार संदिग्ध गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। बॉर्डर इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ-साथ ड्रग्स और हथियारों की तस्करी में शामिल नेटवर्क को तोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि सीमा पार से होने वाली इस तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और तकनीकी निगरानी को और मजबूत करने की जरूरत है।
राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बढ़ता खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रग्स और हथियारों की तस्करी का यह गठजोड़ केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है। ऐसे में सीमा क्षेत्रों में सतर्कता और तस्करी के नेटवर्क पर कड़ी कार्रवाई समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

