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राजस्थान: OLA, Uber-Rapido समेत कैब कंपनियों पर परिवहन विभाग का शिकंजा, नए नियम लागू

राजस्थान: OLA, Uber-Rapido समेत कैब कंपनियों पर परिवहन विभाग का शिकंजा, नए नियम लागू

राजस्थान सरकार ने कैब और राइड-हेलिंग कंपनियों के संचालन पर सख्त नियम लागू करने का बड़ा फैसला किया है। परिवहन विभाग ने OLA, Uber, Rapido और अन्य ई-रिक्शा व टैक्सी सर्विस प्रदाताओं पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसका उद्देश्य यात्री सुरक्षा, भुगतान पारदर्शिता और परिवहन कानूनों का पालन सुनिश्चित करना है।

परिवहन विभाग के अनुसार, नई एग्रीगेटर पॉलिसी के तहत राइड-हेलिंग कंपनियों को राज्य सरकार द्वारा जारी नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा। नियमों में कहा गया है कि कंपनियों को पंजीकृत वाहन, ड्राइवरों की फिटनेस, वाहन बीमा, लाइसेंस और नियमित निरीक्षण सुनिश्चित करना होगा। साथ ही, यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के लिए आपातकालीन सुविधाओं और शिकायत निवारण प्रणाली को भी लागू करना अनिवार्य होगा।

प्रदेश के परिवहन संयुक्त सचिव और अतिरिक्त आयुक्त ओपी बुनकर ने बताया कि कंपनियों के ड्राइवरों और वाहन मालिकों के डेटा को ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना होगा, ताकि प्रशासन किसी भी समय निगरानी कर सके। उन्होंने कहा कि अब कोई भी कंपनी नियमों का उल्लंघन नहीं कर पाएगी, अन्यथा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई और जुर्माना लगेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में राइड-हेलिंग कंपनियों के बढ़ते उपयोग के साथ सुरक्षा, भुगतान और कानूनी अनुपालन में कई चुनौतियां सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का यह कदम यात्री और ड्राइवर दोनों के हित में है।

नए नियमों के तहत कंपनियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी समय वाहन खराब या बिना लाइसेंस के न चले। इसके अलावा, यात्रियों की शिकायतें 24 घंटे के भीतर निपटाई जाएं और किसी भी गंभीर घटना की रिपोर्ट सीधे परिवहन विभाग को दी जाए।

परिवहन विभाग ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी अनियमित या अवैध वाहन सेवा के बारे में तुरंत सूचना दें। अधिकारियों ने कहा कि सरकार की इस नई नीति का मकसद यात्री सुरक्षा बढ़ाना, भ्रष्टाचार रोकना और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

राजस्थान में अब कैब कंपनियों की सख्त निगरानी और नियंत्रण होगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नए नियम लागू होने के बाद OLA, Uber, Rapido और अन्य सेवाओं को नियमित निरीक्षण और लाइसेंस प्रक्रिया के तहत ही संचालन की अनुमति मिलेगी।

इस कदम से राज्य में राइड-हेलिंग सेवाओं का विश्वास बढ़ेगा और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, साथ ही गैरकानूनी और अवैध संचालन करने वाले एजेंटों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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