Rajasthan Summer Vacation 2026: इस बार 45 नहीं 35 दिन की होंगी गर्मी की छुट्टियां, जानिए क्या है वजह
राजस्थान में भीषण गर्मी के बीच स्कूली बच्चों और अभिभावकों के लिए गर्मी की छुट्टियों को लेकर बड़ी चर्चा शुरू हो गई है। Garmi Ki Chutti Kab Hogi 2026 Rajasthan को लेकर इस बार एक बड़ा बदलाव सामने आया है। पिछले साल जहां करीब 45 दिन तक गर्मी की छुट्टियां रही थीं, वहीं इस बार सिर्फ 35 दिन की छुट्टियां प्रस्तावित हैं। छुट्टियों की अवधि घटने के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं।
जानकारी के मुताबिक इस बार गर्मी की छुट्टियां 10 दिन कम किए जाने के फैसले के पीछे शैक्षणिक कैलेंडर को संतुलित रखने पर जोर दिया गया है। शिक्षा सत्र, पाठ्यक्रम पूरा कराने और परीक्षाओं के कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया बताया जा रहा है।
पिछले साल भीषण गर्मी और मौसम की परिस्थितियों को देखते हुए छुट्टियों की अवधि लंबी रखी गई थी। लेकिन इस बार शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक गतिविधियों को प्रभावित न होने देने के लिए छुट्टियों की अवधि सीमित करने का फैसला किया है।
सूत्रों के अनुसार पाठ्यक्रम पूरा कराने, बोर्ड और अन्य परीक्षाओं के शेड्यूल तथा नए शैक्षणिक सत्र की तैयारी को देखते हुए यह बदलाव किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि लंबे अवकाश से पढ़ाई प्रभावित होती है, इसलिए इस बार संतुलन बनाने की कोशिश की गई है।
हालांकि भीषण गर्मी को देखते हुए इस फैसले पर चर्चा भी तेज हो गई है। प्रदेश में तापमान लगातार ऊंचा बना हुआ है और ऐसे में कई लोग छुट्टियां कम किए जाने पर सवाल भी उठा रहे हैं।
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि छुट्टियों की अवधि घटाने के पीछे अकादमिक कारण प्रमुख हैं, जबकि दूसरी ओर अभिभावक और छात्र गर्मी को देखते हुए लंबे अवकाश की मांग भी कर रहे हैं।
राजस्थान में हर साल गर्मी की छुट्टियां मौसम और शैक्षणिक जरूरतों को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं। इस बार 35 दिन की छुट्टियों का फैसला इसी संतुलन का हिस्सा माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार और शिक्षा विभाग पढ़ाई और मौसम, दोनों पहलुओं को ध्यान में रखकर निर्णय लेते हैं। इस बार छुट्टियां कम होने की बड़ी वजह शैक्षणिक सत्र को व्यवस्थित रखना बताया जा रहा है।
फिलहाल 2026 में 45 दिन के बजाय 35 दिन की गर्मी की छुट्टियों की चर्चा ने छात्रों और अभिभावकों के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है। अब सबकी नजर इस फैसले के अंतिम क्रियान्वयन और संभावित बदलावों पर टिकी है।

