राजस्थान राज्यसभा चुनाव 2026: उम्मीदवार तय, अब जीत के गणित में जुटीं बीजेपी-कांग्रेस
राजस्थान में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून है, जबकि 18 जून को मतदान कराया जाएगा। भाजपा और कांग्रेस दोनों अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर चुकी हैं। अब सभी की नजर विधानसभा के संख्या बल और चुनावी गणित पर टिकी हुई है।
बीजेपी और कांग्रेस ने घोषित किए उम्मीदवार
भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा चुनाव के लिए Satish Poonia और Alka Gurjar को उम्मीदवार बनाया है। वहीं कांग्रेस ने मौजूदा राज्यसभा सांसद Neeraj Dangi पर दोबारा भरोसा जताते हुए उन्हें उम्मीदवार घोषित किया है।
नीरज डांगी 2020 में पहली बार राज्यसभा पहुंचे थे और पार्टी ने लगातार दूसरी बार उन्हें मौका दिया है।
क्या कहता है विधानसभा का गणित?
राजस्थान विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर भाजपा दो सीटों और कांग्रेस एक सीट पर मजबूत स्थिति में नजर आ रही है। यही वजह है कि सतीश पूनिया, अलका गुर्जर और नीरज डांगी की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
हालांकि राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि भाजपा तीसरा उम्मीदवार भी उतार सकती है। यदि ऐसा होता है तो चुनाव दिलचस्प मोड़ ले सकता है और क्रॉस वोटिंग, निर्दलीय विधायकों तथा छोटे दलों की भूमिका अहम हो सकती है।
नामांकन से लेकर मतदान तक का कार्यक्रम
- नामांकन की अंतिम तिथि: 8 जून
- नामांकन पत्रों की जांच: निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार
- नाम वापसी: चुनाव आयोग के तय शेड्यूल के अनुसार
- मतदान: 18 जून
- मतगणना: मतदान के दिन ही
राज्यसभा चुनाव में विधायक मतदान करते हैं और उम्मीदवारों की जीत विधानसभा में मौजूद संख्या बल पर निर्भर करती है।
राजनीतिक गतिविधियां हुईं तेज
उम्मीदवारों की घोषणा के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने विधायकों के साथ संपर्क बढ़ा दिया है। पार्टी नेतृत्व किसी भी तरह की राजनीतिक चूक से बचना चाहता है। चुनाव भले ही संख्या बल के हिसाब से स्पष्ट दिखाई दे रहा हो, लेकिन राज्यसभा चुनावों में हर वोट का महत्व होता है।
सभी की नजरें 18 जून पर
राजस्थान की तीन राज्यसभा सीटों के लिए होने वाला यह चुनाव राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भाजपा अपने दोनों उम्मीदवारों को जीत दिलाने की तैयारी में जुटी है, जबकि कांग्रेस नीरज डांगी की जीत सुनिश्चित करने के लिए रणनीति बना रही है।
फिलहाल चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ नजर आ रही है, लेकिन यदि कोई नया उम्मीदवार मैदान में उतरता है या राजनीतिक समीकरण बदलते हैं तो मुकाबला और रोचक हो सकता है। ऐसे में 18 जून को होने वाले मतदान पर प्रदेश की राजनीति की नजरें टिकी हुई हैं।

