राजस्थान पंचायत चुनाव 2026: वेतन बिल रुकने से चिकित्सकों में नाराजगी, आरएमसीटीए ने जताई आपत्ति
Rajasthan में प्रस्तावित राजस्थान पंचायत आम चुनाव-2026 की तैयारियों के बीच चिकित्सकों में नाराजगी देखने को मिल रही है। चुनाव प्रक्रिया से जुड़े प्रशासनिक आदेशों के कारण चिकित्सा विभाग के कई चिकित्सकों का फरवरी माह का वेतन बिल रुक जाने का मामला सामने आया है। इस स्थिति पर Rajasthan Medical and Health Services Association (आरएमसीटीए) ने कड़ी आपत्ति जताते हुए सरकार और प्रशासन से तुरंत समाधान की मांग की है।
जानकारी के अनुसार पंचायत चुनावों की तैयारियों के तहत राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को चुनावी कार्यों में लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसी क्रम में चिकित्सा विभाग के कई चिकित्सकों और कर्मचारियों को भी चुनाव ड्यूटी से संबंधित औपचारिकताओं और प्रक्रियाओं में शामिल किया गया है। प्रशासनिक स्तर पर कुछ तकनीकी और प्रक्रियात्मक कारणों से फरवरी माह के वेतन बिल जारी नहीं हो सके, जिससे चिकित्सकों में असंतोष बढ़ गया है।
चिकित्सकों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में शामिल किए जाने के कारण कई जगहों पर वेतन बिलों के अनुमोदन और भुगतान की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। परिणामस्वरूप कई डॉक्टरों को समय पर वेतन नहीं मिल पाया। उनका कहना है कि पहले ही चिकित्सा सेवाओं में कार्यभार काफी अधिक रहता है, ऐसे में वेतन में देरी से कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
इस मुद्दे को लेकर Rajasthan Medical and Health Services Association ने राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। संगठन का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया के कारण यदि किसी प्रकार की प्रशासनिक बाधा उत्पन्न होती है तो उसका असर चिकित्सकों के वेतन पर नहीं पड़ना चाहिए। संगठन ने मांग की है कि सभी लंबित वेतन बिलों को तुरंत पारित कर भुगतान किया जाए।
आरएमसीटीए के पदाधिकारियों का कहना है कि चिकित्सा सेवाएं एक आवश्यक सेवा के रूप में मानी जाती हैं। डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी लगातार अस्पतालों में मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं। ऐसे में उनके वेतन में देरी होना न केवल कर्मचारियों के मनोबल को प्रभावित करता है, बल्कि इससे स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी अप्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।
चिकित्सकों ने यह भी कहा कि यदि चुनावी कार्यों में उनकी ड्यूटी लगाई जाती है तो उसके लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और व्यवस्थाएं पहले से सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि नियमित प्रशासनिक कार्य और वेतन संबंधी प्रक्रियाएं प्रभावित न हों।
उधर विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मामला प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है और जल्द ही आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर वेतन बिल जारी करने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार चुनावी तैयारियों के कारण कई विभागों में अतिरिक्त काम बढ़ गया है, लेकिन कर्मचारियों को जल्द राहत देने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
फिलहाल इस मुद्दे को लेकर चिकित्सकों में नाराजगी बनी हुई है और वे जल्द से जल्द फरवरी माह का वेतन जारी करने की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत चुनाव जैसी बड़ी प्रक्रिया के दौरान भी आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों के वेतन और प्रशासनिक कार्यों को प्रभावित नहीं होने देना चाहिए।

