राजस्थान: बीमा कंपनियों ने GST हटने के बाद प्रीमियम में 8-12% की बढ़ोतरी की, उपभोक्ता मायूस
राजस्थान सहित कई राज्यों में बीमा कंपनियों ने जीएसटी (GST) हटने के बाद अपने बीमा प्रीमियम में 8 से 12 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कर दी है। इस कदम से उपभोक्ताओं को मिलने वाली राहत उल्टी, और उन्हें पहले से अधिक प्रीमियम चुकाना पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, बीमा कंपनियों ने यह बढ़ोतरी जीएसटी हटने और प्रशासनिक खर्चों में बढ़ोतरी का हवाला देकर की है। हालांकि, उपभोक्ताओं का कहना है कि पहले उन्हें उम्मीद थी कि जीएसटी हटने के बाद बीमा प्रीमियम कम होगा, लेकिन इसके विपरीत उन्हें अब अधिक भुगतान करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बीमा कंपनियों का यह कदम नागरिकों के लिए आर्थिक बोझ बढ़ा सकता है। उन्होंने बताया कि मोटर, स्वास्थ्य और जीवन बीमा जैसी पॉलिसियों में इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।
बीमा सेक्टर के सूत्रों के अनुसार, बढ़े हुए प्रीमियम के पीछे कंपनियों की लागत बढ़ोतरी और प्रशासनिक व्यय प्रमुख वजहें हैं। इसके साथ ही, कई कंपनियां अपने लाभ मार्जिन को बनाए रखने के लिए भी प्रीमियम बढ़ा रही हैं।
उपभोक्ताओं का कहना है कि सरकार और बीमा नियामक IRDAI को इस पर ध्यान देना चाहिए। उन्हें उम्मीद है कि प्रीमियम में बढ़ोतरी और ग्राहकों पर पड़ने वाले असर को लेकर उचित कदम उठाए जाएंगे।
राजस्थान में इस बढ़ोतरी के बाद कई उपभोक्ता बीमा पॉलिसियों के विकल्पों और कवरेज की समीक्षा करने को मजबूर हो गए हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि उपभोक्ताओं को प्रीमियम और कवर की तुलना कर ही पॉलिसी लेना चाहिए, ताकि वित्तीय नुकसान कम हो।
बीमा कंपनियों की इस नई चाल ने उपभोक्ताओं में नाखुशी और मायूसी बढ़ा दी है, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि जीएसटी हटने से सस्ती और आसान बीमा सुविधा मिलेगी। अब यह सवाल उठ रहा है कि कंपनियों और नियामक एजेंसियों के बीच संतुलन कैसे स्थापित होगा ताकि उपभोक्ता सुरक्षा और आर्थिक राहत दोनों पा सकें।

