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राजस्थान हाईकोर्ट ने खान विभाग की मनमानी पर लगाई रोक, भीलवाड़ा के खान मालिकों को मिली राहत

राजस्थान हाईकोर्ट ने खान विभाग की मनमानी पर लगाई रोक, भीलवाड़ा के खान मालिकों को मिली राहत

राजस्थान उच्च न्यायालय ने खान विभाग की मनमानी पर रोक लगाते हुए भीलवाड़ा जिले के खान मालिकों को बड़ी राहत दी है। न्यायाधीश डॉ. नुपुर भाटी की एकलपीठ ने आदेश में स्पष्ट किया है कि खान धारक (लीज होल्डर) को पूर्व सूचना दिए बिना किया गया ड्रोन सर्वे अवैध है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि इसी अवैध सर्वे के आधार पर खान विभाग द्वारा जारी किए गए “कारण बताओ नोटिस” और वसूली की कार्रवाई को निरस्त किया जाता है। न्यायालय ने आदेश में यह स्पष्ट किया कि किसी भी ड्रोन सर्वे या निरीक्षण के दौरान खान मालिक को पूर्व सूचना देना अनिवार्य है और बिना नोटिस किए गई कार्रवाई कानूनी मान्यता नहीं रखती।

भीलवाड़ा के खान मालिकों ने कोर्ट के इस आदेश का स्वागत किया है। उनका कहना है कि लंबे समय से वे विभाग की मनमानी और अचानक की जाने वाली वसूली की कार्रवाई से परेशान थे। अब न्यायालय के आदेश से उन्हें राहत मिली है और उनकी कानूनी स्थिति स्पष्ट हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला खान विभाग और खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया के महत्व को दर्शाता है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि सरकारी कार्रवाई हमेशा कानूनी ढांचे और प्रक्रिया का पालन करते हुए की जानी चाहिए।

राजस्थान हाईकोर्ट का यह आदेश भीलवाड़ा सहित पूरे राज्य के खनन क्षेत्र में मिसाल माना जा रहा है। इससे अन्य खान मालिकों को भी अपने अधिकारों की सुरक्षा के प्रति आश्वासन मिलेगा और प्रशासनिक कार्रवाई में पारदर्शिता बढ़ेगी। स्पष्ट है कि न्यायालय ने खान मालिकों के हितों और कानूनी प्रक्रिया की रक्षा करते हुए यह संदेश दिया है कि मनमानी और बिना सूचना की कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है।

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