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राजस्थान हाईकोर्ट की राज्य सरकार को फटकार, वीडियो में बोला- ट्रिब्यूनल नहीं चला सकते तो बंद कर दीजिए; 7 दिन में नियुक्ति के आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट की राज्य सरकार को फटकार, वीडियो में बोला- ट्रिब्यूनल नहीं चला सकते तो बंद कर दीजिए; 7 दिन में नियुक्ति के आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण (रेट) में लंबे समय से अध्यक्ष और सदस्यों के पद खाली रहने पर राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने सुनवाई के दौरान नाराजगी जताते हुए कहा कि यदि सरकार ट्रिब्यूनल का संचालन नहीं कर सकती तो उसे बंद कर देना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बड़ी संख्या में तबादले किए जा रहे हैं, ऐसे में कर्मचारी अपनी शिकायतों के निस्तारण के लिए आखिर कहां जाएं।यह टिप्पणी जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण में रिक्त पदों को भरने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिका अधिवक्ता दिलीप सिंह कुरका, संदीप कलवानिया सहित अन्य वकीलों की ओर से दायर की गई है।

7 दिन में नियुक्ति करने के निर्देश

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए कि राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण में अध्यक्ष और सदस्यों के रिक्त पदों पर सात दिन के भीतर नियुक्तियां की जाएं।कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा में नियुक्तियां नहीं की जाती हैं, तो 11 अगस्त को राज्य के कार्मिक सचिव को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में उपस्थित होना होगा।

लंबे समय से खाली हैं महत्वपूर्ण पद

अदालत के समक्ष बताया गया कि रेट के अध्यक्ष का पद 19 मार्च 2026 से खाली है। तत्कालीन अध्यक्ष विकास सीताराम भले के तबादले के बाद से इस पद पर किसी नए अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं की गई।इसके अलावा अधिकरण में सदस्यों के चार स्वीकृत पद हैं, जिनमें से दो लंबे समय से रिक्त हैं। वर्तमान में पूर्व आईएएस अधिकारी प्रकाश शर्मा को अध्यक्ष का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है, जबकि न्यायिक सदस्य पूनम दरगन स्वास्थ्य कारणों से नियमित रूप से कार्य नहीं कर पा रही हैं।

कर्मचारियों की शिकायतों के निस्तारण पर सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार ने बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारियों के तबादले किए हैं। ऐसे में यदि अपील अधिकरण में अध्यक्ष और सदस्य ही नहीं होंगे, तो कर्मचारी अपनी सेवा संबंधी शिकायतों और अपीलों के निस्तारण के लिए कहां जाएंगे।अदालत ने संकेत दिया कि रिक्त पदों के कारण अधिकरण का कामकाज गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है, जिससे कर्मचारियों को न्याय मिलने में अनावश्यक देरी हो रही है।

11 अगस्त की सुनवाई पर टिकी नजर

हाईकोर्ट के सख्त रुख के बाद अब राज्य सरकार के सामने सात दिन के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने की चुनौती है। यदि सरकार समय पर नियुक्तियां नहीं करती है, तो 11 अगस्त को कार्मिक सचिव को अदालत में उपस्थित होकर जवाब देना होगा। हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को प्रशासनिक व्यवस्था और न्यायिक संस्थाओं में रिक्त पदों को लेकर सरकार के प्रति कड़ा संदेश माना जा रहा है।

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