राजस्थान हाईकोर्ट का सख्त आदेश: राज्यभर के हाईवे से 2216 अतिक्रमण दो महीने में हटाए जाएं
राजस्थान हाईकोर्ट ने सड़क सुरक्षा को नागरिकों के जीवन के अधिकार से जोड़ते हुए राज्यभर के नेशनल और स्टेट हाईवे पर फैले 2216 अतिक्रमण को हटाने का सख्त आदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह कदम सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने और सार्वजनिक जीवन की रक्षा के लिए आवश्यक है।
हाईकोर्ट का आदेश
हाईकोर्ट ने कहा कि राजमार्गों के राइट ऑफ वे (ROW) क्षेत्र में मौजूद किसी भी प्रकार की संरचना—चाहे वह मंदिर, मजार, मकान या दुकान हो—कानूनन अवैध मानी जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी अतिक्रमण को नियमित नहीं किया जाएगा और उसे दो महीने के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।
आदेश का उद्देश्य
विशेषज्ञों के अनुसार यह आदेश सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक प्रवाह को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। हाईकोर्ट ने यह रुख इसलिए अपनाया क्योंकि अतिक्रमण हाईवे पर दुर्घटनाओं और मार्ग बाधाओं का प्रमुख कारण बन सकते हैं। अदालत ने कहा कि नागरिकों का जीवन और सड़क सुरक्षा किसी भी अतिक्रमण से अधिक महत्वपूर्ण है।
प्रशासन और राज्य सरकार की भूमिका
राजस्थान सरकार और संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी अतिक्रमणों की पहचान करें और उन्हें हटाने के लिए सक्रिय कार्रवाई करें। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रशासन को दो महीने के भीतर पूरी प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
सामाजिक और कानूनी प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट के इस आदेश से सड़क पर चलने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और हाईवे पर अवैध निर्माण और अतिक्रमणों में कमी आएगी। वहीं, ऐसे आदेश से अतिक्रमण करने वालों और स्थानीय समुदायों में असंतोष की संभावना भी बनी रहती है।
आगे की कार्रवाई
अतिक्रमण हटाने के बाद प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि सड़क किनारे निर्माण और सुरक्षा उपाय के नियमों का पालन किया जाए। हाईकोर्ट ने यह भी कहा है कि किसी भी संरचना को नियमित करने का प्रयास कानून के खिलाफ होगा और उसे हटाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।

