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राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बाद शहरी सेवा शिविर-2026 की छह प्रमुख योजनाओं पर रोक

राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बाद शहरी सेवा शिविर-2026 की छह प्रमुख योजनाओं पर रोक

प्रदेशभर में चल रहे शहरी सेवा शिविर-2026 को राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश के बाद बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने शिविर के तहत जमीन और पट्टों से जुड़ी छह प्रमुख राहत योजनाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इससे सरकारी जमीन, कच्ची बस्तियों और कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों से जुड़े लोगों की पट्टा प्रक्रिया प्रभावित हो गई है।

शहरी सेवा शिविर-2026 के माध्यम से सरकार की ओर से आम लोगों को विभिन्न शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराने और लंबित मामलों का समाधान करने का प्रयास किया जा रहा था। इसके तहत जमीन से जुड़े मामलों में राहत देने और पट्टे जारी करने की प्रक्रिया भी शामिल थी। लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इन योजनाओं पर अस्थायी रोक लगा दी गई है।

जानकारी के अनुसार, रोक लगने वाली योजनाओं में सरकारी भूमि, कच्ची बस्तियों और कृषि भूमि पर विकसित बस्तियों से संबंधित पट्टा जारी करने की प्रक्रियाएं शामिल हैं। इससे उन लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा, जो लंबे समय से अपने मकान या जमीन के नियमितीकरण की उम्मीद लगाए बैठे थे।

सरकार के इस फैसले के बाद नगरीय निकायों में भी असमंजस की स्थिति बन गई है। अधिकारियों को नई प्रक्रिया और आगे की कार्रवाई को लेकर दिशा-निर्देशों का इंतजार है। वहीं, शिविरों में आवेदन करने वाले लोगों को भी अब अपने मामलों के निस्तारण के लिए इंतजार करना होगा।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने संबंधित विभागों और नगरीय निकायों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि इन योजनाओं के तहत आगे की कार्रवाई फिलहाल नहीं की जाए। हालांकि, अन्य सामान्य सेवाओं और नागरिक सुविधाओं से जुड़े कार्यों पर इसका असर नहीं पड़ेगा।

लोगों का कहना है कि शहरी सेवा शिविर के जरिए उन्हें वर्षों पुराने जमीन और पट्टों से जुड़े मामलों के समाधान की उम्मीद थी। अब रोक लगने से उनकी चिंता बढ़ गई है। कई लोगों ने सरकार से इस मामले में जल्द स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

वहीं, प्रशासनिक स्तर पर हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन किया जा रहा है। आगे की रणनीति और कानूनी प्रक्रिया पर विचार के बाद ही सरकार कोई निर्णय लेगी।

शहरी सेवा शिविर-2026 की पट्टा संबंधी योजनाओं पर लगी रोक के बाद अब सभी की नजर सरकार के अगले कदम पर है। माना जा रहा है कि हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप ही आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी।

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