राजस्थान हाईकोर्ट ने ऑनर किलिंग मामले में पिता समेत 11 आरोपियों को किया बरी, वीडियो में जाने निचली अदालत ने सुनाई थी फांसी की सजा
राजस्थान हाईकोर्ट ने सीकर के चर्चित ऑनर किलिंग मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए बेटी और उसके प्रेमी की हत्या के आरोप में दोषी ठहराए गए पिता समेत 11 आरोपियों को बरी कर दिया है। नवंबर 2024 में सीकर की एडीजे कोर्ट ने मुख्य आरोपी पिता रामगोपाल उर्फ गोपाल को फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी गई थी। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद आरोप प्रमाणित नहीं होने के आधार पर सभी आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।जस्टिस महेंद्र कुमार गोयल और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। बरी किए गए आरोपियों में पिता रामगोपाल उर्फ गोपाल, चाचा महादेव, मामा परसराम चोपड़ा, चचेरे भाई महेंद्र चौधरी उर्फ महेंद्र मील, नंदलाल, बीरबल, सोहनलाल, मदनलाल, संदीप गुर्जर और बाबूलाल उर्फ हरनेक शामिल हैं।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला 20 अक्टूबर 2019 का है। सीकर जिले के आलोदा गांव में रहने वाली युवती प्रेम अपने प्रेमी गणपतलाल से बातचीत कर रही थी। इसकी भनक युवती के पिता रामगोपाल को लग गई थी। आरोप था कि इसके बाद 21 अक्टूबर की रात रामगोपाल ने बेटी के साथ मारपीट की और उससे गणपतलाल को बुलाने के लिए कहा।बताया गया कि गणपतलाल जब पेट्रोल पंप के पास पहुंचा तो रामगोपाल के कहने पर परिवार के अन्य लोगों ने उसका अपहरण कर लिया। इसके बाद उसे घर ले जाया गया, जहां प्रेम और गणपतलाल दोनों के साथ बेरहमी से मारपीट की गई। आरोपों के मुताबिक, इस दौरान दोनों की मौत हो गई थी।
पहाड़ियों में फेंके थे दोनों के शव
मामले में आरोप था कि दोनों की हत्या के बाद रामगोपाल ने उनके शवों को एक गाड़ी में रखा और जीणमाता-मांडोली की पहाड़ियों में फेंक दिया। इसके बाद उसने खाटूश्यामजी थाने में अपनी बेटी की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट में उसने आशंका जताई थी कि कुछ अज्ञात लोग उसकी बेटी का अपहरण कर ले गए हैं।पुलिस जांच के दौरान मामले की परतें खुलने का दावा किया गया और पिता समेत परिवार के अन्य सदस्यों को आरोपी बनाया गया। जांच और सुनवाई के बाद सीकर की एडीजे कोर्ट ने नवंबर 2024 में रामगोपाल को हत्या का दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। अन्य आरोपियों को उम्रकैद की सजा दी गई थी।
हाईकोर्ट ने सबूतों को नहीं माना पर्याप्त
निचली अदालत के फैसले को आरोपियों ने राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अपीलों पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं हो सके। इसी आधार पर अदालत ने सभी 11 आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।हाईकोर्ट के इस फैसले से करीब पांच साल पुराने इस चर्चित मामले में नया मोड़ आ गया है। जहां निचली अदालत ने इसे ऑनर किलिंग मानते हुए कड़ी सजा सुनाई थी, वहीं हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

