राजस्थान में आबकारी विभाग का राजस्व लक्ष्य 11 साल में ढाई गुना के करीब, अब 17 हजार करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य
राजस्थान में आबकारी विभाग के राजस्व लक्ष्य में पिछले 11 वर्षों के दौरान बड़ी बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2015-16 में विभाग के लिए 6,712 करोड़ रुपए का राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जो वर्ष 2026-27 में बढ़कर 17,000 करोड़ रुपए हो गया है। इस तरह इस अवधि में राजस्व लक्ष्य में 10,288 करोड़ रुपए की वृद्धि हुई है। आंकड़ों के अनुसार, विभाग का वार्षिक लक्ष्य करीब ढाई गुना के स्तर तक पहुंच गया है।
राजस्व लक्ष्य में लगातार हो रही बढ़ोतरी से आबकारी विभाग पर निर्धारित आय जुटाने की जिम्मेदारी भी बढ़ी है। राज्य सरकार के लिए आबकारी राजस्व बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में विभाग की ओर से राजस्व संग्रह की निगरानी, लाइसेंस व्यवस्था और नियमों के पालन पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
6,712 करोड़ से 17 हजार करोड़ रुपए तक पहुंचा लक्ष्य
वर्ष 2015-16 में आबकारी विभाग को 6,712 करोड़ रुपए का राजस्व जुटाने का लक्ष्य दिया गया था। इसके बाद अगले वर्षों में लक्ष्य बढ़ता गया और 2026-27 में यह 17 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच गया। दोनों आंकड़ों के बीच 10,288 करोड़ रुपए का अंतर है।
यह बढ़ोतरी बताती है कि बीते वर्षों में राज्य के आबकारी राजस्व से जुड़ी अपेक्षाएं काफी बढ़ी हैं। हालांकि, केवल लक्ष्य बढ़ने से वास्तविक राजस्व संग्रह में हुई वृद्धि का पता नहीं चलता। इसके लिए प्रत्येक वित्तीय वर्ष के निर्धारित लक्ष्य और वास्तविक प्राप्तियों के आंकड़ों की तुलना करना जरूरी है।
राजस्व लक्ष्य बढ़ने के पीछे क्या हो सकते हैं कारण
आबकारी विभाग के राजस्व लक्ष्य में बदलाव के पीछे शराब की बिक्री से मिलने वाली आय, लाइसेंस शुल्क, आबकारी नीति, कर और शुल्क की दरों सहित कई कारक प्रभाव डाल सकते हैं। इसके अलावा बाजार की स्थिति और विभाग की राजस्व वसूली व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होती है।
किसी वर्ष का लक्ष्य तय करते समय सरकार संभावित राजस्व संग्रह और बजट की जरूरतों को ध्यान में रख सकती है। हालांकि, राजस्थान में पिछले 11 वर्षों के दौरान लक्ष्य बढ़ाने के लिए किन विशिष्ट कारणों को आधार बनाया गया, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
लक्ष्य और वास्तविक कमाई में अंतर समझना जरूरी
राजस्व लक्ष्य वह अनुमानित राशि होती है, जिसे सरकार किसी वित्तीय वर्ष में जुटाना चाहती है। इसके विपरीत वास्तविक राजस्व वह रकम है, जो संबंधित अवधि में वास्तव में सरकारी खजाने में जमा होती है। इसलिए 17 हजार करोड़ रुपए का लक्ष्य निर्धारित होने का अर्थ यह नहीं है कि इतनी राशि पहले ही प्राप्त हो चुकी है।
वित्तीय वर्ष 2026-27 में आबकारी विभाग अपने निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले कितना राजस्व जुटा पाता है, यह जानने के लिए वर्ष के दौरान जारी होने वाले आधिकारिक आंकड़ों पर नजर रखनी होगी।
कुल मिलाकर, राजस्थान में आबकारी विभाग का राजस्व लक्ष्य 2015-16 के 6,712 करोड़ रुपए से बढ़कर 2026-27 में 17 हजार करोड़ रुपए हो गया है। इस बढ़ोतरी के साथ विभाग के सामने राजस्व लक्ष्य हासिल करने की चुनौती भी महत्वपूर्ण बनी हुई है।

