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राजस्थान बीजेपी में मोर्चों की कार्यकारिणी गठन में देरी, फुटेज में देंखे ढाई महीने बाद भी अटकी घोषणा

राजस्थान बीजेपी में मोर्चों की कार्यकारिणी गठन में देरी, फुटेज में देंखे ढाई महीने बाद भी अटकी घोषणा

राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विभिन्न मोर्चों की कार्यकारिणी गठन की प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। मोर्चों के अध्यक्षों की घोषणा हुए करीब ढाई महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक प्रदेश स्तरीय कार्यकारिणी और जिला अध्यक्षों के नाम सामने नहीं आए हैं, जिससे संगठन के भीतर सुस्ती को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने 29 दिसंबर को युवा, अल्पसंख्यक, ओबीसी, एससी, एसटी और किसान मोर्चा के अध्यक्षों की घोषणा की थी। इसके बाद 1 जनवरी को महिला मोर्चा के अध्यक्ष के नाम का भी ऐलान कर दिया गया था। इस तरह कुल सात मोर्चों के अध्यक्ष तय हो गए थे, लेकिन उनके अधीन कार्यकारिणी गठन की प्रक्रिया अब तक अधूरी है।

सूत्रों के अनुसार, सभी मोर्चों के अध्यक्षों ने अपनी-अपनी कार्यकारिणी के लिए संभावित नामों की सूची प्रदेशाध्यक्ष को सौंप दी है। हालांकि इन नामों पर अब तक अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। पार्टी के भीतर विभिन्न स्तरों पर नामों को लेकर असहमति सामने आ रही है, जिसके चलते सूची को अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है।

बताया जा रहा है कि संगठन के वरिष्ठ नेताओं के बीच संतुलन साधने और सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने को लेकर गहन मंथन चल रहा है। यही कारण है कि नामों को लेकर एक राय बनाने में समय लग रहा है। पार्टी नेतृत्व नहीं चाहता कि जल्दबाजी में कोई फैसला लिया जाए, जिससे बाद में असंतोष की स्थिति पैदा हो।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कार्यकारिणी गठन में देरी का असर संगठन की सक्रियता पर पड़ सकता है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी को जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की जरूरत है। मोर्चों की भूमिका संगठन विस्तार और विभिन्न वर्गों तक पहुंच बनाने में अहम मानी जाती है।

फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी नेतृत्व कब तक इस गतिरोध को खत्म कर कार्यकारिणी की घोषणा करता है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लिया जा सकता है, ताकि संगठनात्मक गतिविधियों को गति दी जा सके।

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