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राजस्थान विधानसभा में रसोई गैस की बढ़ी कीमतों पर गर्मागर्म बहस

राजस्थान विधानसभा में रसोई गैस की बढ़ी कीमतों पर गर्मागर्म बहस

मंगलवार को राजस्थान विधानसभा में रसोई गैस की बढ़ती कीमतों का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने राज्य सरकार पर आम जनता के लिए राहत नहीं देने का आरोप लगाते हुए गैस की लगातार बढ़ती कीमतों और कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति में हो रही कठिनाइयों को लेकर सवाल उठाए।

टीकाराम जूली ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में घरेलू रसोई गैस के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे आम परिवारों पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है। इसके साथ ही, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कमर्शियल सिलेंडरों की आपूर्ति भी संतोषजनक नहीं है और कई उद्योग एवं छोटे व्यवसाय इस कमी से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि वे तत्काल प्रभाव से कदम उठाकर जनता और उद्योग दोनों को राहत प्रदान करें।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा ने कहा कि रसोई गैस की कीमतों में हुई बढ़ोतरी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की बढ़ती कीमतें हैं। मंत्री ने बताया कि सरकार ने प्रयास किया है कि घरेलू स्तर पर अधिकतम नियंत्रण बनाए रखा जाए, लेकिन वैश्विक स्तर पर बढ़ती कीमतों के कारण कुछ सीमाओं के भीतर ही राहत दी जा सकती है।

टीकाराम जूली और सुमित गोदारा के बीच इस मुद्दे पर संसद सदृश बहस भी देखने को मिली। विपक्षी नेता ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि सरकार वास्तविक राहत नहीं देगी तो आम जनता को भारी आर्थिक बोझ झेलना पड़ेगा। वहीं, मंत्री ने विपक्ष को समझाते हुए कहा कि सरकार विभिन्न योजनाओं और सब्सिडी के माध्यम से जनता की मदद कर रही है और लगातार प्रयास किए जा रहे हैं कि बढ़ी हुई कीमतों का असर न्यूनतम हो।

विशेषज्ञों के अनुसार, रसोई गैस की कीमतों में यह वृद्धि केवल राजस्थान ही नहीं बल्कि पूरे देश में देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक वृद्धि, परिवहन लागत और सरकारी कर संरचना जैसे कारण घरेलू गैस सिलेंडरों की कीमतों पर सीधे असर डालते हैं। इसके चलते आम परिवारों और छोटे व्यवसायों पर अतिरिक्त दबाव बनता है।

विपक्ष का कहना है कि सरकार को अंतरराष्ट्रीय कारणों को तर्क के रूप में पेश करने के बजाय स्थानीय स्तर पर राहत और सब्सिडी बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। वहीं, सरकार की प्रतिक्रिया यह रही कि अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों के चलते पूरी तरह से नियंत्रण करना संभव नहीं है, लेकिन प्रयास जारी हैं।

राजस्थान विधानसभा में इस बहस ने यह साफ कर दिया कि रसोई गैस की बढ़ती कीमतों का मुद्दा राज्य की जनता के लिए संवेदनशील है और आगामी महीनों में इसे लेकर राजनीतिक चर्चाएं और जोर पकड़ सकती हैं। आम नागरिकों की अपेक्षा है कि सरकार इस मामले में त्वरित और ठोस कदम उठाए ताकि उनके घरेलू बजट पर पड़ने वाला असर कम किया जा सके।

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